Pakistan lawyer Imaan Mazari में मानवाधिकारों की मुखर आवाज़: इमान माज़री की संघर्षपूर्ण कहानी
पाकिस्तान में मानवाधिकारों की लड़ाई लंबे समय से चुनौतियों और जोखिमों से भरी रही है। राजनीतिक दबाव, सैन्य प्रभुत्व और कानूनों के कथित दुरुपयोग के बीच कुछ ही आवाज़ें ऐसी हैं, जो बिना डरे अपनी बात रखती रही हैं। इन्हीं आवाज़ों में एक नाम है Imaan Mazari—एक युवा, निडर और मुखर मानवाधिकार वकील, जिन्होंने जातीय अल्पसंख्यकों, पत्रकारों और विवादित मामलों में फंसे लोगों के लिए कानूनी लड़ाइयाँ लड़ीं। lawyer Imaan Mazari की पहचान केवल एक वकील के रूप में नहीं, बल्कि एक असहज सवाल पूछने वाली सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी बनी।
संवेदनशील मामलों से पहचान
महज़ 32 वर्ष की उम्र में, lawyer Imaan Mazari ने उन मामलों को हाथ में लिया, जिनसे अक्सर लोग दूरी बनाए रखते हैं। जब पत्रकार मानहानि के मुकदमों में फँसते हैं, जब जातीय समुदायों के लोग जबरन गायब किए जाते हैं, या जब किसी पर ईशनिंदा जैसे संगीन आरोप लगते हैं—तब उनकी कानूनी मदद के लिए सबसे आगे यही नाम दिखा। इन मामलों ने उन्हें राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला खड़ा किया, पर साथ ही उनके लिए जोखिम भी बढ़ा दिया।
न्यायपालिका और सत्ता से टकराव
जैसे-जैसे उनकी लोकप्रियता और प्रभाव बढ़ा, वैसे-वैसे उनके खिलाफ मामलों की सूची भी लंबी होती चली गई। “साइबर आतंकवाद”, “हेट स्पीच” और “राज्य विरोधी गतिविधियों” जैसे आरोप लगाए गए। आलोचक कहते हैं कि इन धाराओं का इस्तेमाल असहमति को दबाने के लिए किया गया। lawyer Imaan Mazari का तर्क रहा कि आलोचना और मानवाधिकारों की पैरवी को देशद्रोह की तरह पेश करना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।
10 साल की सज़ा और तत्काल गिरफ्तारी
शनिवार को इस संघर्ष ने एक निर्णायक मोड़ लिया, जब इस्लामाबाद की एक अदालत ने lawyer Imaan Mazari और उनके पति—वरिष्ठ वकील हादी अली चट्ठा—को “राज्य विरोधी” सोशल मीडिया पोस्ट्स के मामले में 10-10 वर्ष की जेल सज़ा सुनाई। अदालत के दस्तावेज़ों में कथित तौर पर “अत्यंत आपत्तिजनक सामग्री” फैलाने का आरोप लगाया गया। सज़ा से ठीक एक दिन पहले, दंपति को एक अन्य मामले की सुनवाई में जाते समय फिर से गिरफ्तार किया गया।
‘हम पीछे नहीं हटेंगे’
अदालत में दिए बयान में lawyer Imaan Mazari ने कहा, “इस देश में सच कहना बेहद कठिन होता जा रहा है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्होंने यह जोखिम जानते हुए चुना था और अब वे इसके परिणाम झेलने के लिए भी तैयार हैं। “हम पीछे नहीं हटेंगे,”—यह वाक्य उनके संघर्ष का प्रतीक बन गया।
अस्मा जहाँगीर से तुलना
उनके अडिग रुख और निर्भीकता के कारण कई लोग उनकी तुलना पाकिस्तान की दिवंगत मानवाधिकार अधिवक्ता अस्मा जहाँगीर से करने लगे हैं। इस तुलना पर lawyer Imaan Mazari ने इसे “सम्मान और विशेषाधिकार” बताया। यह तुलना केवल व्यक्तित्व की नहीं, बल्कि उस विचारधारा की है जो सत्ता के सामने झुकने से इनकार करती है।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और मूल्य
वे पूर्व मानवाधिकार मंत्री शिरीन माज़री की बेटी हैं। उनके पिता देश के शीर्ष बाल रोग विशेषज्ञों में गिने जाते थे। इस सुदृढ़ पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद lawyer Imaan Mazari ने आरामदायक जीवन के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना। उनकी माँ ने कहा कि बेटी की सुरक्षा को लेकर परिवार चिंतित रहता है, लेकिन शोषितों की आवाज़ बनना गर्व की बात भी है।
बलोच समुदाय और गायबशुदगियाँ
उनके काम का एक बड़ा हिस्सा जबरन गायब किए गए लोगों के मामलों से जुड़ा रहा। उन्होंने बलोच समुदाय के अधिकारों पर काम किया और चर्चित कार्यकर्ता महरंग बलोच की कानूनी मदद की। lawyer Imaan Mazari का कहना रहा है कि जब न्याय तक पहुंच रोकी जाती है, तब कानून के जरिए ही रास्ता बनाना पड़ता है।
ईशनिंदा के आरोप और अफगान शरणार्थी
ईशनिंदा जैसे मामलों में पैरवी पाकिस्तान में अत्यंत जोखिम भरी मानी जाती है। इसके बावजूद lawyer Imaan Mazari ने इन मामलों को स्वीकार किया। उन्होंने अफगान शरणार्थियों के खिलाफ कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उनका मानना है कि कानून का इस्तेमाल भय पैदा करने के बजाय संरक्षण देने के लिए होना चाहिए।
संविधानिक बदलाव और नागरिक अधिकार
विश्लेषकों के मुताबिक, हाल के वर्षों में संवैधानिक बदलावों और जल्दबाज़ी में बने कानूनों ने राज्य नियंत्रण को और मजबूत किया है। इससे राजनीतिक और नागरिक अधिकार सिमटे हैं। lawyer Imaan Mazari इन बदलावों की मुखर आलोचक रही हैं और कहती हैं कि मानवाधिकारों का हनन धीरे-धीरे ‘नियम’ बनाया जा रहा है।
पत्रकारों की पैरवी
पत्रकार असद अली तूर, जिनका प्रतिनिधित्व उन्होंने कई मामलों में किया, कहते हैं कि Imaan Mazari “राज्य के लिए निरंतर चुनौती” हैं। कारण साफ़ है—वे हर उस व्यक्ति के साथ खड़ी रहीं जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सत्ता के निशाने पर रहा।
लैंगिक भेदभाव और ऑनलाइन हमले
कानूनी लड़ाई के साथ-साथ उन्होंने लैंगिक भेदभाव का सामना भी किया। सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ और छेड़छाड़ की गई तस्वीरें फैलाई गईं। ऐसे वातावरण में, जहाँ महिलाओं की कार्यक्षेत्र में भागीदारी सीमित है, Imaan Mazari का टिके रहना अपने आप में प्रतिरोध का प्रतीक है।
अंतरराष्ट्रीय मान्यता
उनके साहस और प्रभाव को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी मान्यता मिली। 2025 में उन्हें वर्ल्ड एक्सप्रेशन फोरम द्वारा “यंग इंस्पिरेशन अवार्ड” से सम्मानित किया गया। संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत ने भी उनके खिलाफ मामलों को “कानूनी प्रणाली का मनमाना उपयोग” बताते हुए चिंता जताई।
सैन्य आरोप और सार्वजनिक बयान
जनवरी 2026 में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सेना के प्रवक्ता ने उनके सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला देते हुए “छिपे तत्वों” पर आरोप लगाए। Imaan Mazari ने इन आरोपों को मानवाधिकार कार्य को बदनाम करने की कोशिश बताया। उनका कहना रहा कि लोकतंत्र और अधिकारों की बात करना देशद्रोह नहीं हो सकता।
संघर्ष जारी रखने का संकल्प
सज़ा और आरोपों के बावजूद Imaan Mazari ने अपने पति के साथ संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया। “हम पहले नहीं हैं जिन्हें गैरकानूनी तरीके से कैद किया गया,” उन्होंने कहा, “और न ही आख़िरी होंगे।”
निष्कर्ष
Imaan Mazari की कहानी केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस व्यापक संघर्ष की है जहाँ कानून, साहस और नैतिक दृढ़ता सत्ता से टकराती है। 10 साल की सज़ा उनके रास्ते में बाधा हो सकती है, पर उनके विचार और प्रभाव इससे परे हैं। पाकिस्तान के मानवाधिकार इतिहास में उनका नाम एक ऐसे अध्याय के रूप में दर्ज होगा, जिसने खामोशी के दौर में आवाज़ बुलंद की—और कहा, “हम लड़ते रहेंगे।
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