आयकर रिफंड में देरी क्यों? जानिए नियम, समय-सीमा और जरूरी कदम
वित्त वर्ष 2024–25 (आकलन वर्ष 2025–26) के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले लाखों करदाता आज भी अपने रिफंड का इंतजार कर रहे हैं। सोशल मीडिया, टैक्स फोरम और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के पास सबसे आम सवाल यही है कि Income Tax Refund कब मिलेगा और इसमें देरी क्यों हो रही है। हालांकि देरी चिंता का विषय लग सकती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह असामान्य नहीं है और अधिकतर मामलों में यह किसी गंभीर समस्या का संकेत नहीं होता।
इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि रिफंड में देरी के पीछे क्या कारण हैं, आयकर विभाग की समय-सीमा क्या है, करदाताओं को किन बातों पर ध्यान देना चाहिए और अगर तय समय तक रिटर्न प्रोसेस न हो तो आगे क्या होता है।
आयकर रिटर्न प्रोसेसिंग की मौजूदा स्थिति
आयकर पोर्टल के अनुसार, 19 जनवरी 2026 तक देश में कुल 13.67 करोड़ पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं। इनमें से:
8.82 करोड़ आयकर रिटर्न दाखिल किए जा चुके हैं
8.69 करोड़ रिटर्न का सत्यापन हो चुका है
8.17 करोड़ रिटर्न प्रोसेस किए जा चुके हैं
इसके बावजूद 51 लाख से अधिक करदाता अब भी अपने Income Tax Refund की प्रतीक्षा में हैं। यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि देरी का मुद्दा बड़े पैमाने पर है और इसे केवल व्यक्तिगत चूक के रूप में नहीं देखा जा सकता।
आयकर विभाग को कितनी देर तक रिफंड देने का अधिकार है?
यह समझना बहुत जरूरी है कि आयकर विभाग के पास रिटर्न प्रोसेस करने और Income Tax Refund जारी करने के लिए वैधानिक समय-सीमा होती है।
वित्त वर्ष 2024–25 से संबंधित रिटर्न के लिए आयकर विभाग 31 दिसंबर 2026 तक रिटर्न प्रोसेस कर सकता है। इसका अर्थ यह है कि अभी भी विभाग कानूनी रूप से निर्धारित समय के भीतर है और केवल देरी होने से यह नहीं माना जा सकता कि रिफंड अटक गया है या अस्वीकृत हो गया है।
रिफंड में देरी के प्रमुख कारण
1. हाई-वैल्यू रिफंड क्लेम
जिन करदाताओं ने बड़ी राशि का Income Tax Refund क्लेम किया है, उनके रिटर्न आमतौर पर अतिरिक्त स्वचालित जांच (automated checks) के दायरे में आते हैं। इससे प्रोसेसिंग में समय लगता है।
2. सेक्शन 245(2) के तहत एडजस्टमेंट
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 245(2) के तहत विभाग पुराने टैक्स बकाया के खिलाफ रिफंड को समायोजित कर सकता है। ऐसे मामलों में Income Tax Refund अस्थायी रूप से रोका जा सकता है।
3. गलत या अधूरी जानकारी
कई बार PAN-आधार लिंक, बैंक अकाउंट वेरिफिकेशन या गलत IFSC कोड के कारण भी रिफंड अटक जाता है।
टैक्सपेयर्स की आम गलतियाँ
टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, देरी का एक बड़ा कारण खुद करदाताओं की छोटी-छोटी भूलें भी होती हैं।
Tax2win के CEO और को-फाउंडर अभिषेक सोनी बताते हैं कि कई सैलरीड कर्मचारियों ने ITR में 80C, 80D, HRA जैसी छूटों का दावा तो किया, लेकिन ये विवरण उन्होंने अपने नियोक्ता को नहीं दिए थे, जिसके कारण TDS डेटा से मिसमैच हो गया।
ऐसे मामलों में Income Tax Refund तब तक जारी नहीं होता, जब तक करदाता आयकर विभाग द्वारा भेजी गई सूचना (intimation) का जवाब नहीं देता।
टैक्स रेजीम मिसमैच भी बड़ी वजह
Nangia Global के पार्टनर मनीष बावा के अनुसार, कई रिटर्न पुराने टैक्स रेजीम में फाइल किए जाते हैं, जबकि TDS नई टैक्स व्यवस्था के अनुसार कटा होता है।
इस तरह की विसंगतियां सिस्टम के लिए लाल झंडी होती हैं और परिणामस्वरूप Income Tax Refund की प्रोसेसिंग धीमी हो जाती है।
आयकर विभाग की इंटिमेशन का जवाब क्यों जरूरी है?
जब भी आयकर विभाग को किसी जानकारी में विसंगति दिखती है, तो वह करदाता को नोटिस या इंटिमेशन भेजता है।
यदि करदाता समय पर इसका जवाब नहीं देता:
रिफंड रोका जा सकता है
भविष्य में संशोधित या अपडेटेड रिटर्न फाइल करना पड़ सकता है
इसलिए Income Tax Refund पाने के लिए पोर्टल पर नियमित रूप से लॉग-इन कर नोटिफिकेशन चेक करना बेहद जरूरी है।
अगर 31 दिसंबर 2026 तक रिटर्न प्रोसेस न हो तो क्या होगा?
चार्टर्ड अकाउंटेंट सुरेश सुराना के अनुसार, सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर (CPC) को रिटर्न दाखिल किए गए वित्त वर्ष के अंत से 9 महीने के भीतर सेक्शन 143(1) के तहत इंटिमेशन जारी करना अनिवार्य है।
यदि कोई ITR:
31 जुलाई 2025
16 सितंबर 2025
या 31 दिसंबर 2025 (बेलटेड)
को फाइल किया गया है, तो 31 दिसंबर 2026 अंतिम तिथि होगी। इसके बाद CPC को रिटर्न प्रोसेस करने का कानूनी अधिकार नहीं रहता। ऐसे मामलों में Income Tax Refund का दावा करदाता के पक्ष में मजबूत हो जाता है।
क्या फाइल करने की तारीख से फर्क पड़ता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, रिटर्न जिस तारीख को दाखिल किया गया, वह प्रोसेसिंग की समय-सीमा को न तेज करता है और न ही टालता है, बशर्ते रिटर्न वैध अवधि के भीतर दाखिल हो।
इसका मतलब है कि अगर आपने सितंबर या दिसंबर की विस्तारित समय-सीमा में रिटर्न भरा है, तब भी Income Tax Refund के मामले में आपको कानूनन समान अधिकार मिलते हैं।
‘NUDGE’ अभियान और रिफंड में देरी
दिसंबर 2025 में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने ‘नज अभियान’ (NUDGE Campaign) शुरू किया। इस पहल का उद्देश्य करदाताओं को संभावित विसंगतियों के बारे में पहले ही सचेत करना है।
इसके तहत:
SMS और ई-मेल के जरिए सूचनाएं भेजी जा रही हैं
करदाताओं को संशोधित या अपडेटेड रिटर्न फाइल करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है
हालांकि यह पहल कर अनुपालन सुधारने के लिए है, लेकिन जब तक करदाता प्रतिक्रिया नहीं देता, तब तक संबंधित Income Tax Refund रोका जा सकता है।
रिफंड पाने के लिए करदाता क्या करें?
कर विशेषज्ञ निम्नलिखित कदम सुझाते हैं:
आयकर पोर्टल पर लॉग-इन कर रिफंड स्टेटस नियमित रूप से जांचें
किसी भी इंटिमेशन या नोटिस का समय पर जवाब दें
बैंक अकाउंट और PAN-आधार लिंक की पुष्टि करें
जरूरत पड़ने पर संशोधित रिटर्न फाइल करें
ये कदम उठाकर Income Tax Refund की प्रक्रिया को तेज किया जा सकता है।
निष्कर्ष: धैर्य और सतर्कता है सबसे जरूरी
रिफंड में देरी परेशान कर सकती है, लेकिन मौजूदा आंकड़े और नियम स्पष्ट करते हैं कि आयकर विभाग अभी भी अपनी वैधानिक समय-सीमा के भीतर है। अधिकतर मामलों में देरी तकनीकी, प्रक्रियात्मक या छोटी मानवीय भूलों के कारण होती है।
यदि करदाता सतर्क रहें, पोर्टल पर आने वाली सूचनाओं का जवाब दें और दस्तावेज सही रखें, तो Income Tax Refund अंततः उनके खाते में पहुंच जाएगा।
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