Pakistan Army की मदद से ब्रॉड पीक पर रेस्क्यू ऑपरेशन तेज, हिमस्खलन के बाद लापता 10 पर्वतारोहियों की तलाश जारी
पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र स्थित दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों में शामिल ब्रॉड पीक (8,047 मीटर) पर आए भीषण हिमस्खलन (Avalanche) के बाद लापता हुए 10 पर्वतारोहियों की तलाश के लिए बड़े स्तर पर रेस्क्यू अभियान जारी है। इस अभियान में Pakistan Army की एविएशन विंग ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पाकिस्तान सेना ने दो विशेष रेस्क्यू हेलीकॉप्टर, प्रशिक्षित बचावकर्मियों और अत्याधुनिक उपकरणों को घटनास्थल पर भेजा है, ताकि कठिन पहाड़ी परिस्थितियों में फंसे पर्वतारोहियों का जल्द से जल्द पता लगाया जा सके।
यह हादसा काराकोरम पर्वत श्रृंखला में स्थित ब्रॉड पीक पर हुआ, जहां दुनिया के अलग-अलग देशों से आए अनुभवी पर्वतारोही चढ़ाई कर रहे थे। हिमस्खलन के बाद कई पर्वतारोहियों से संपर्क टूट गया, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन, अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान और Pakistan Army ने संयुक्त रूप से खोज एवं बचाव अभियान शुरू किया।
ब्रॉड पीक पर कैसे हुआ हादसा?
Pakistan Army की सहायता से जारी रेस्क्यू अभियान के अनुसार, हिमस्खलन ब्रॉड पीक के लोअर कैंप-III के नीचे आया। प्रसिद्ध पाकिस्तानी पर्वतारोही और टूर ऑपरेटर मिर्जा अली के अनुसार, अचानक बर्फ का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गया, जिससे वहां मौजूद कई पर्वतारोही इसकी चपेट में आ गए।
ब्रॉड पीक दुनिया की 14 आठ-हजार मीटर से ऊंची चोटियों में शामिल है। यहां चढ़ाई बेहद कठिन मानी जाती है और मौसम कुछ ही मिनटों में बदल सकता है। ऊंचाई, कम ऑक्सीजन और बर्फीले तूफानों के कारण यहां किसी भी बचाव अभियान को अंजाम देना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है।
Pakistan Army ने कैसे संभाली कमान?
हादसे की जानकारी मिलते ही Pakistan Army एविएशन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दो रेस्क्यू हेलीकॉप्टर रवाना किए। इन हेलीकॉप्टरों में विशेष रूप से प्रशिक्षित बचाव दल, हाई-एल्टीट्यूड रेस्क्यू उपकरण और मेडिकल सहायता सामग्री भेजी गई।
ऊंचाई और खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टरों का संचालन आसान नहीं है, लेकिन Pakistan Army का कहना है कि मौसम की अनुमति मिलने पर हवाई निगरानी और राहत अभियान लगातार जारी रहेगा। हेलीकॉप्टरों की मदद से उन इलाकों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है जहां जमीन के रास्ते पहुंचना लगभग असंभव है।
अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान का बयान
अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान ने बताया कि Pakistan Army और अन्य सरकारी एजेंसियां मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। क्लब ने सेना की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि सभी लापता पर्वतारोहियों को सुरक्षित खोज लिया जाएगा।
क्लब ने यह भी कहा कि वह केवल सत्यापित जानकारी ही सार्वजनिक करेगा ताकि अफवाहों से बचा जा सके।
कौन-कौन हैं लापता पर्वतारोही?
Pakistan Army द्वारा चलाए जा रहे अभियान में जिन 10 पर्वतारोहियों की तलाश की जा रही है, वे विभिन्न देशों से हैं—
- नाधिरा अहमद अब्दुल्ला अल हार्थी (ओमान)
- सोहेल सखी (पाकिस्तान)
- वांग झोंग (चीन)
- मैलोरी गीस (अमेरिका)
- निर्मल पुरजा “निम्स दाई” (नेपाल)
- पुर बहादुर गुरूंग “युक्ता” (नेपाल)
- किली पेम्बा शेरपा “कीलू” (नेपाल)
- नीमा शेरपा (नेपाल)
- नवांग थिंदू शेरपा (नेपाल)
- ग्यालू शेरपा (नेपाल)
इन पर्वतारोहियों में कई ऐसे हैं जिन्हें दुनिया के सबसे अनुभवी हाई-एल्टीट्यूड क्लाइम्बर्स में गिना जाता है।
बचाव अभियान में क्या चुनौतियां हैं?
Pakistan Army के लिए यह अभियान कई कारणों से बेहद कठिन है।
- 8,000 मीटर से अधिक की ऊंचाई
- ऑक्सीजन की कमी
- लगातार बर्फबारी
- हिमस्खलन का दोबारा खतरा
- खराब दृश्यता
- अत्यधिक ठंड
- सीमित लैंडिंग क्षेत्र
इन परिस्थितियों में हेलीकॉप्टर उड़ाना और बचाव कार्य करना बेहद जोखिम भरा माना जाता है।
ब्रॉड पीक क्यों है खतरनाक?
ब्रॉड पीक पाकिस्तान के काराकोरम पर्वत क्षेत्र में स्थित है और इसे दुनिया की सबसे कठिन चोटियों में गिना जाता है।
हर साल यहां दुनिया भर से सैकड़ों पर्वतारोही पहुंचते हैं, लेकिन मौसम की अनिश्चितता और लगातार हिमस्खलन का खतरा इसे बेहद चुनौतीपूर्ण बना देता है।
विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों और बर्फ की स्थिति तेजी से बदल रही है, जिससे हिमस्खलन की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
हाई-एल्टीट्यूड रेस्क्यू क्यों मुश्किल होता है?
Pakistan Army के रेस्क्यू विशेषज्ञों के अनुसार 8,000 मीटर से ऊपर के क्षेत्र को “डेथ ज़ोन” कहा जाता है।
इस ऊंचाई पर—
- ऑक्सीजन बेहद कम होती है।
- शरीर जल्दी थक जाता है।
- हेलीकॉप्टरों की क्षमता सीमित हो जाती है।
- मौसम अचानक बदल सकता है।
- बचाव दल के लिए भी जान का खतरा रहता है।
इसी वजह से ऐसे अभियानों में विशेष प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरणों की आवश्यकता होती है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत
चूंकि लापता पर्वतारोही कई देशों से हैं, इसलिए यह घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता का विषय बन गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में विभिन्न देशों की एजेंसियों के बीच समन्वय और आधुनिक खोज तकनीकों का उपयोग बेहद महत्वपूर्ण होता है।
आगे क्या होगा?
Pakistan Army ने संकेत दिया है कि मौसम अनुकूल रहने तक खोज अभियान जारी रहेगा। ग्राउंड टीम और हेलीकॉप्टर मिलकर संभावित स्थानों की तलाश कर रहे हैं।
अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान ने लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक अपडेट पर ही भरोसा करें।
निष्कर्ष
Pakistan Army की सहायता से ब्रॉड पीक पर चलाया जा रहा खोज एवं बचाव अभियान दुनिया के सबसे कठिन हाई-एल्टीट्यूड रेस्क्यू ऑपरेशनों में से एक माना जा रहा है। 10 लापता पर्वतारोहियों की तलाश लगातार जारी है और बचाव दल समय के खिलाफ दौड़ लगा रहे हैं। खराब मौसम, अत्यधिक ऊंचाई और हिमस्खलन का खतरा अभियान को और चुनौतीपूर्ण बना रहा है। सभी की उम्मीद है कि लापता पर्वतारोहियों का जल्द पता चल सके और उन्हें सुरक्षित बचाया जा सके।
Read More:
13 Indian Sailors Stranded: 7 बड़े खुलासे, यूक्रेन ने भारत पर उठाए गंभीर सवाल




