भारतीय सिक्योरिटी और एक्सचेंज बोर्ड (SEBI) ने BofA पर लगाया इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों का उल्लंघन, किया बड़ा खुलासा
भारत के बाजार नियामक, सिक्योरिटी और एक्सचेंज बोर्ड (SEBI), ने बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) के एक यूनिट पर इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों का उल्लंघन करने और अपनी आंतरिक “चाइनीज़ वॉल्स” को तोड़ने का आरोप लगाया है। यह मामला 2024 के मार्च महीने में अदित्य बिर्ला सन लाइफ एसेट मैनेजमेंट (ABSL AMC) के शेयरों की बिक्री के दौरान सामने आया।
SEBI के नोटिस के अनुसार, बैंक के डील टीम ने जो अप्रकाशित मूल्य संवेदनशील जानकारी (UPSI) अपने पास रखी थी, उसे संभावित निवेशकों के साथ “प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष” रूप से साझा किया। इस पूरी प्रक्रिया में बैंक के ब्रोकिंग, रिसर्च और एशिया-पैसिफिक सिंडिकेट टीम ने निवेशकों के साथ बातचीत की और वैल्यूएशन रिपोर्ट्स व अन्य गोपनीय जानकारी साझा की।
“चाइनीज़ वॉल्स” का उल्लंघन
SEBI ने आरोप लगाया कि बैंक का डील टीम चाइनीज़ वॉल्स के सिद्धांत का पालन करने में विफल रहा। इसका मतलब है कि डील टीम के पास जो संवेदनशील जानकारी थी, उसे अन्य विभागों से साझा नहीं किया जाना चाहिए था। SEBI ने कहा, “बैंक की ब्रोकिंग, रिसर्च और सिंडिकेट टीम ने डील टीम की ओर से काम किया, जो कि इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों का उल्लंघन था।”
क्या है भारतीय इनसाइडर ट्रेडिंग नियम?
भारतीय इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों के तहत किसी भी निवेश बैंक को एक बार जब उसे किसी लेन-देन को संभालने का काम सौंपा जाता है, तो उसे उस लेन-देन से संबंधित मूल्य संवेदनशील जानकारी को केवल डील टीम तक सीमित रखना होता है। अन्य विभागों को ऐसी जानकारी का आदान-प्रदान करने की अनुमति नहीं होती।
SEBI ने बताया कि बैंक ने इस प्रक्रिया में यह नियम तोड़ा और ब्रोकिंग, रिसर्च और सिंडिकेट टीम को शेयरों के बारे में जानकारी दी, जबकि लेन-देन की आधिकारिक घोषणा मार्च 2024 में की जानी थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि इनसाइडर ट्रेडिंग के नियमों का उल्लंघन हुआ है।
SEBI की तफ्तीश और बैंक का पक्ष
SEBI की तफ्तीश में पाया गया कि BofA ने शुरू में इन बैठकों या बातचीत को नकारा किया, यह दावा किया कि उनका आंतरिक कानूनी समीक्षा इस बात को सही मानती है कि कोई उल्लंघन नहीं हुआ था। लेकिन, जब SEBI ने HDFC Life और Enam से प्राप्त जवाबों के आधार पर बैंक से सवाल किए, तब उन्होंने यह स्वीकार किया कि निवेशकों के साथ बातचीत की थी।
बैंक के अधिकारी हुए थे निष्कासित
SEBI ने यह भी बताया कि बैंक ने तीन अधिकारियों को नवंबर 2024 में इस्तीफा देने या छोड़ने के लिए कहा था। इन अधिकारियों पर आरोप था कि उन्होंने निवेशकों से मिलने के लिए आवश्यक मंजूरी नहीं ली और जांच में अड़चन डाली। हालांकि, SEBI ने यह स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई सिक्योरिटी कानूनों का उल्लंघन करने के कारण नहीं की गई थी, बल्कि आंतरिक प्रोटोकॉल के उल्लंघन के कारण थी।
क्या परिणाम हो सकते हैं?
इस मामले में SEBI का मानना है कि यह सिर्फ पारंपरिक इनसाइडर ट्रेडिंग मामला नहीं है, बल्कि यह एक आंतरिक नियंत्रण विफलता का मामला है, जिसे गंभीर नियामक कार्रवाई की आवश्यकता हो सकती है। इस मामले में बैंक ने कुछ गलत बयान दिए और महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया, जिससे SEBI की जांच में दिक्कतें आईं।
भारतीय इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों की सख्ती
भारत में इनसाइडर ट्रेडिंग के खिलाफ सख्त नियम हैं। कोई भी निवेशक या कंपनी जो जानबूझकर संवेदनशील जानकारी का इस्तेमाल करके वित्तीय बाजारों में अनुचित लाभ कमाने की कोशिश करती है, उसे कड़ी सजा मिल सकती है। SEBI का यह कदम इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जिसमें नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
क्या होगी आगे की कार्रवाई?
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए SEBI अब मामले की और गहराई से जांच करेगा और यह तय करेगा कि क्या इस मामले में अधिक कार्रवाई की आवश्यकता है। इसके साथ ही, बैंक ऑफ अमेरिका को इस मामले में सुधारात्मक कदम उठाने के लिए भी कहा जा सकता है, ताकि भविष्य में ऐसे उल्लंघनों को रोका जा सके।
निष्कर्ष
भारत में इनसाइडर ट्रेडिंग के नियमों का उल्लंघन करने का मामला काफी गंभीर है, और SEBI की तफ्तीश इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह निवेशकों को यह संदेश देता है कि वे अपनी निवेश प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी बनाए रखें, और किसी भी प्रकार के नियम उल्लंघन से बचें। BofA के मामले में SEBI द्वारा उठाए गए कदम यह दिखाते हैं कि नियामक संस्थाएं इन उल्लंघनों को गंभीरता से ले रही हैं, और किसी भी स्तर पर होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए काम कर रही हैं।
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