तमिलनाडु में NEET विवाद पर बढ़ा सियासी दबाव, दिल्ली छात्र आंदोलन पर मुख्यमंत्री विजय की चुप्पी सवालों के घेरे में
देशभर में NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र संगठन और विभिन्न समूह लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इसी बीच तमिलनाडु की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। Tamil Nadu Chief Minister Vijay की इस मुद्दे पर सार्वजनिक चुप्पी विपक्ष, शिक्षा विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के निशाने पर आ गई है।
तमिलनाडु लंबे समय से NEET परीक्षा का विरोध करता रहा है। ऐसे में राज्य की नई सरकार और Tamil Nadu Chief Minister Vijay से उम्मीद की जा रही थी कि वे दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन पर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया देंगे। हालांकि अब तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
दिल्ली में NEET विरोध प्रदर्शन के बीच उठे सवाल
देशभर में NEET परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र संगठन और कई सामाजिक समूह प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में सुधार और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
इसी बीच Tamil Nadu Chief Minister Vijay की चुप्पी चर्चा का विषय बन गई है। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कई बार NEET का विरोध किया था और ग्रामीण तथा आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के हितों की रक्षा करने का वादा किया था। इसलिए अब उनके मौन को लेकर राजनीतिक विरोधी सवाल उठा रहे हैं।
तमिलनाडु में NEET का पुराना विरोध
तमिलनाडु उन राज्यों में शामिल है जिसने शुरुआत से ही NEET परीक्षा का विरोध किया है। राज्य सरकारों और कई राजनीतिक दलों का तर्क रहा है कि यह परीक्षा ग्रामीण क्षेत्रों, सरकारी स्कूलों और तमिल माध्यम से पढ़ने वाले छात्रों के लिए समान अवसर उपलब्ध नहीं कराती।
इसी कारण Tamil Nadu Chief Minister Vijay से भी यह अपेक्षा की जा रही थी कि वे राज्य की पारंपरिक नीति के अनुरूप इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाएंगे।
छात्र आत्महत्याओं के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
राज्य सरकार के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 से 2024 के बीच तमिलनाडु में NEET से जुड़े कारणों के चलते कम से कम 26 छात्रों की मौत दर्ज की गई। इनमें परीक्षा का दबाव, असफलता का डर और कथित अनियमितताओं जैसी वजहें शामिल बताई गई हैं।
इन्हीं घटनाओं को देखते हुए शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि Tamil Nadu Chief Minister Vijay को छात्रों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
चुनाव में किया था NEET विरोध का वादा
चुनाव प्रचार के दौरान Tamil Nadu Chief Minister Vijay ने कई सभाओं में कहा था कि उनकी सरकार छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी और NEET का विरोध जारी रखेगी।
इसी वजह से अब विपक्ष का आरोप है कि सत्ता में आने के बाद सरकार अपने पुराने वादों से पीछे हटती दिखाई दे रही है।
हालांकि सरकार की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।
फिल्म के प्रचार को लेकर भी हुई आलोचना
विवाद तब और बढ़ गया जब Tamil Nadu Chief Minister Vijay ने अपनी आगामी फिल्म के प्रचार से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जबकि उसी समय दिल्ली में छात्र आंदोलन जारी था।
आलोचकों का कहना है कि छात्रों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने के बजाय फिल्म प्रचार पर ध्यान देना गलत संदेश देता है। हालांकि समर्थकों का कहना है कि केवल सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
रैपर अरिवु की हिरासत ने बढ़ाया विवाद
तमिल रैपर अरिवु ने चेन्नई सचिवालय के पास NEET समाप्त करने की मांग को लेकर प्रदर्शन करने का प्रयास किया।
पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। हिरासत के दौरान उन्होंने कहा कि जब पूरा देश NEET को लेकर चर्चा कर रहा है तो Tamil Nadu Chief Minister Vijay इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं।
बाद में अरिवु की मुख्यमंत्री से मुलाकात कराई गई, लेकिन इसके बाद भी सरकार की ओर से कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया।
विपक्ष ने साधा निशाना
डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने अरिवु की हिरासत की आलोचना करते हुए कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय सुना जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि देशभर में NEET के खिलाफ आंदोलन तेज हो रहा है, लेकिन राज्य सरकार की चुप्पी युवाओं को निराश कर रही है।
हालांकि यह राजनीतिक बयान है और सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अनिता की घटना आज भी बनी हुई है प्रतीक
तमिलनाडु में NEET विरोध की चर्चा 2017 की छात्रा एस. अनिता के मामले के बिना अधूरी मानी जाती है।
अनिता ने कक्षा 12 में शानदार अंक प्राप्त किए थे, लेकिन NEET परीक्षा में सफलता नहीं मिलने के बाद उन्होंने आत्महत्या कर ली थी।
इस घटना ने पूरे राज्य में व्यापक विरोध प्रदर्शन को जन्म दिया और NEET विरोध आंदोलन को नई दिशा मिली।
आज भी कई सामाजिक संगठन इस घटना का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि Tamil Nadu Chief Minister Vijay को इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट नीति सामने रखनी चाहिए।
भाषा का मुद्दा भी बना बड़ा कारण
विशेषज्ञों का कहना है कि तमिल माध्यम के छात्रों के सामने भाषा भी एक बड़ी चुनौती है।
हालांकि पिछले वर्षों में तमिल भाषा में परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों की संख्या बढ़ी थी, लेकिन हाल के आंकड़ों में इसमें गिरावट दर्ज की गई है।
शिक्षाविदों का मानना है कि क्षेत्रीय भाषाओं में समान अवसर सुनिश्चित करना भी शिक्षा सुधार का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि Tamil Nadu Chief Minister Vijay फिलहाल केंद्र सरकार के साथ सीधे टकराव से बचने की रणनीति अपना सकते हैं।
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि उनकी सरकार फिलहाल राज्य प्रशासन, किसानों और अन्य स्थानीय मुद्दों पर अधिक ध्यान दे रही है।
दूसरी ओर कई विश्लेषकों का मानना है कि छात्रों से जुड़े इतने बड़े राष्ट्रीय मुद्दे पर सरकार की चुप्पी लंबे समय तक राजनीतिक बहस का विषय बनी रह सकती है।
शिक्षा विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
कई शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान परीक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है।
उनका मानना है कि छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव, प्रतियोगी परीक्षाओं की जटिलता और पारदर्शिता से जुड़े सवालों का समाधान नीति स्तर पर किया जाना चाहिए।
साथ ही उन्होंने कहा कि Tamil Nadu Chief Minister Vijay सहित सभी राज्यों को शिक्षा सुधार पर मिलकर काम करना चाहिए ताकि छात्रों का विश्वास मजबूत हो सके।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल दिल्ली में विरोध प्रदर्शन जारी हैं और तमिलनाडु सरकार की ओर से किसी बड़े बयान का इंतजार किया जा रहा है।
यदि सरकार भविष्य में आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है, तो राज्य की NEET नीति और राष्ट्रीय स्तर पर उसकी भूमिका अधिक स्पष्ट हो सकती है।
निष्कर्ष
NEET परीक्षा को लेकर देशभर में बहस जारी है और तमिलनाडु एक बार फिर इस चर्चा के केंद्र में है। Tamil Nadu Chief Minister Vijay की चुप्पी को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दल, शिक्षा विशेषज्ञ और सामाजिक संगठन अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। वहीं सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।
यह ध्यान रखना आवश्यक है कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप अपनी जगह हैं, लेकिन इस पूरे मामले में अंतिम निष्कर्ष सरकार के आधिकारिक रुख, जांच प्रक्रियाओं और भविष्य में लिए जाने वाले नीतिगत निर्णयों के आधार पर ही सामने आएगा। शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, छात्रों की सुरक्षा और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करना सभी पक्षों की साझा जिम्मेदारी है।
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