नई दिल्ली में India AI Impact Summit 2026 का भव्य आगाज़, लेकिन दिन-1 की अव्यवस्था ने आयोजकों की परीक्षा ले ली
सोमवार को राजधानी के भारत मंडपम (प्रगति मैदान) में India AI Impact Summit 2026 की शुरुआत बेहद ऊँचे उत्साह और भारी भीड़ के बीच हुई। स्टार्टअप फाउंडर्स, वैश्विक टेक कंपनियों के प्रतिनिधि, नीति-निर्माता, शोधकर्ता, छात्र-डेवलपर्स और अंतरराष्ट्रीय डेलिगेशन—हजारों लोग इसे “दुनिया के सबसे बड़े AI आयोजनों में से एक” बताकर देखने-समझने पहुँचे।
लेकिन पहले ही दिन यह भी साफ हो गया कि India AI Impact Summit के स्केल जितना बड़ा है, “लास्ट-माइल ऑपरेशन” उतना ही कठिन भी। प्रवेश-द्वारों पर भीड़-जाम, लंबी कतारें, अस्पष्ट निर्देश, रजिस्ट्रेशन glitches और सुरक्षा-प्रक्रियाओं को लेकर प्रदर्शकों की नाराज़गी—इन वजहों से कई लोगों को कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही समय और ऊर्जा का बड़ा हिस्सा गेट पर गंवाना पड़ा।
दिन-1 की तस्वीरों और ग्राउंड रिपोर्ट्स में हॉल के बाहर सैकड़ों-हजारों लोगों की कतारें दिखाई दीं। Reuters की फोटो-कैप्शन के साथ सामने आए विजुअल्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स ने “क्राउड मैनेजमेंट” को सबसे बड़ा मुद्दा बना दिया।
1) हजारों की भीड़: “इंटरस्ट” तो मिला, पर सिस्टम पीछे रह गया
पहले दिन की भारी उपस्थिति अपने आप में एक संकेत है कि भारत में AI को लेकर उत्साह अब केवल टेक-कम्युनिटी तक सीमित नहीं रहा। सरकारी विभागों, उद्योग-संघों, स्टार्टअप इकोसिस्टम, शिक्षा-संस्थानों और निवेशक-नेटवर्क्स—सभी की दिलचस्पी यहाँ एक साथ दिखी। कई लोग नई तकनीकों के लाइव डेमो, निवेश/साझेदारी की बातचीत, और नीति-स्तर की चर्चाओं के लिए पहुँचे थे।
पर बड़े आयोजन में सबसे बड़ी चुनौती “एक साथ पहुँचना” होती है। जब हजारों लोग एक ही समय-खंड में प्रवेश करना चाहते हैं, तो बैज-कलेक्शन, स्कैनिंग, सुरक्षा जांच और गेट-मैनेजमेंट का तालमेल सबसे बड़ी कसौटी बन जाता है। यदि दिशानिर्देश स्पष्ट न हों या स्टाफ के निर्देश एक-दूसरे से अलग हों, तो भीड़ का बहाव (crowd flow) अटकता है—और फिर 10 मिनट की देरी “घंटों” में बदल जाती है।
2) प्रवेश प्रक्रिया: रजिस्ट्रेशन-गेट-सिक्योरिटी के बीच समन्वय की कमी
कई प्रतिभागियों का कहना था कि एंट्री के अलग-अलग चरण (रजिस्ट्रेशन/चेक-इन → बैज कलेक्शन → सुरक्षा जांच → हॉल एंट्री) एक साथ स्मूद नहीं चल पाए। कभी लाइनें आपस में मिक्स हो गईं, कभी एक ही जगह पर कई क्यू बन गईं, और कई लोगों को बार-बार गेट बदलना पड़ा। कुछ जगहों पर वालंटियर्स अलग दिशा बता रहे थे और सुरक्षा कर्मियों के निर्देश अलग थे, जिससे भ्रम बढ़ा।
यही अनुभव एक व्यावहारिक सलाह में बदल गया—कि India AI Impact Summit में आने वालों को “1–2 घंटे अतिरिक्त” लेकर चलना चाहिए, ताकि देरी के बावजूद वे अपने सेशन्स, पैनल-टॉक्स या बुक्ड मीटिंग्स मिस न करें। कई लोगों ने कहा कि वे समय पर पहुँचने के बावजूद उद्घाटन या शुरुआती हिस्से का कुछ भाग नहीं देख पाए, क्योंकि प्रवेश प्रक्रिया में बहुत देर हो गई।
3) प्रदर्शकों की परेशानी: “स्टॉल खाली करो”—और फिर कब लौटें, पता नहीं
सबसे तीखी शिकायतें प्रदर्शकों और स्टार्टअप बूथ-होल्डर्स की तरफ से आईं। उनका कहना था कि सुरक्षा-सवीप/हाई-सिक्योरिटी मूवमेंट के दौरान उनसे अपने स्टॉल खाली कराने को कहा गया, लेकिन इसके बाद यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि एक्सेस कब और कैसे वापस मिलेगा। कुछ लोगों ने बताया कि उन्हें घंटों तक हॉल के बाहर रोका गया, जबकि उनके बूथ अंदर थे और डेमो/मीटिंग्स का समय निकल रहा था।
स्टार्टअप्स के लिए यह सीधा “खर्च बनाम अवसर” का सवाल है। बूथ फीस, लॉजिस्टिक्स, स्टाफ, होटल-ट्रैवल—ये सब केवल “उपस्थिति” के लिए नहीं, बल्कि लाइव डेमो और नेटवर्किंग के लिए किया जाता है। यदि उसी समय स्टॉल तक पहुँचना संभव न हो, तो छोटी-सी ऑपरेशनल चूक भी बड़े बिजनेस नुकसान में बदल सकती है: मीटिंग्स छूटना, संभावित ग्राहक/पार्टनर खोना, और टीम के लिए तनाव बढ़ना।
4) प्रधानमंत्री उद्घाटन: सुरक्षा सख्ती स्वाभाविक, पर संचार कमजोर
रिपोर्ट के मुताबिक आयोजन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था का कड़ा होना अपेक्षित था।
लेकिन कई शिकायतें “सुरक्षा” के खिलाफ नहीं, बल्कि “सुरक्षा-समन्वय और संचार” के खिलाफ थीं—जैसे अचानक निर्देश, अस्पष्ट समय-सीमा, और यह स्पष्ट न होना कि प्रदर्शक अपने कीमती प्रोटोटाइप/हार्डवेयर को कैसे सुरक्षित रखें। कुछ ने कहा कि यदि किसी अवधि में हॉल खाली कराया जाना था, तो इसका पूर्व-सूचना तंत्र (alerts/announcements) ज्यादा व्यवस्थित होना चाहिए था।
5) सबसे चर्चित आरोप: AI वियरेबल्स के गायब होने की शिकायत
दिन-1 की अव्यवस्था के बीच सबसे चर्चित मामला धनंजय यादव (Neo Sapien) के दावे से जुड़ा रहा। उन्होंने कहा कि सुरक्षा जांच के दौरान जब उन्हें स्टॉल खाली करने को कहा गया, तब उनकी कंपनी के AI वियरेबल्स “गायब” हो गए। उनका दावा था कि उन्होंने फ्लाइट, होटल, लॉजिस्टिक्स और बूथ पर खर्च किया, लेकिन हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में ही उनके डिवाइसेज़ नहीं मिल पाए।
यह आरोप सार्वजनिक रूप से सामने आया है और अभी किसी आधिकारिक निष्कर्ष/जांच का परिणाम सामने नहीं है। फिर भी, ऐसे मामलों का असर आयोजन की “ट्रस्ट” पर पड़ता है, क्योंकि प्रदर्शक अपनी तकनीक और प्रोटोटाइप को लेकर सबसे संवेदनशील होते हैं। इसी कारण कई लोगों ने कहा कि India AI Impact Summit जैसे मंच पर स्टॉल-सुरक्षा और शिकायत-निवारण की स्पष्ट SOP (प्रक्रिया) पहले दिन से ही दिखनी चाहिए थी।
6) “घंटों बाहर खड़े रहे”: स्टार्टअप समुदाय का असंतोष
सोशल मीडिया पर कई फाउंडर्स और डेलिगेट्स ने कहा कि उन्हें बिना स्पष्ट सूचना के लंबे समय तक बाहर इंतज़ार करना पड़ा। पुनित जैन (Reskill) ने “पूर्व-संचार” और “एक्सेस-क्लैरिटी” की कमी पर असंतोष जताया।
उद्यमी प्रियांशु रत्नाकर ने कतारों, लॉक-आउट और रजिस्ट्रेशन glitches के साथ-साथ कनेक्टिविटी (Wi-Fi/मोबाइल नेटवर्क) की “पैची” स्थिति का भी जिक्र किया। कई लोगों की शिकायत थी कि AI इवेंट में ही इंटरनेट/नेटवर्क कमजोर हो, तो डेमो-टीम, पत्रकार और प्रतिभागी—तीनों का अनुभव खराब होता है।
7) आयोजकों का जवाब: “भीड़-प्रवाह सुधरेगा”—और भरोसा लौटाने की चुनौती
रिपोर्ट के मुताबिक आयोजकों ने कहा कि पहले दिन के अनुभव के बाद भीड़-प्रवाह (crowd flow) और कोऑर्डिनेशन सुधारने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि आने वाले दिनों में एंट्री और एक्सेस मैनेजमेंट ज्यादा स्मूद हो सके।
आयोजकों के लिए India AI Impact Summit को “सिर्फ बड़ा” नहीं, “सही तरह से चलने वाला” मंच बनाना उतना ही जरूरी है, क्योंकि वैश्विक कंपनियाँ और अंतरराष्ट्रीय मेहमान भारत की क्षमता को व्यवस्था के स्तर पर भी परखते हैं। इसीलिए अब उनकी सबसे बड़ी चुनौती यही है कि सुधार सिर्फ बयान तक सीमित न रहे, बल्कि जमीन पर दिखे।
8) ट्रैफिक और पहुँच: बाहर का दबाव भी कम नहीं
भीड़ का दबाव केवल हॉल के अंदर नहीं, बाहर की यात्रा में भी दिखा। The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, 16 से 20 फ़रवरी के दौरान आयोजन-क्षेत्र में ट्रैफिक कंट्रोल, रूट-मैनेजमेंट और कुछ समय-खंडों में प्रतिबंध/डायवर्जन की व्यवस्था की गई।
Mint की रिपोर्ट में प्रवेश-गेट्स, पार्किंग और पहुँच से जुड़ी जानकारी दी गई, और यह भी बताया गया कि आयोजन 20 फ़रवरी तक चलेगा।
इसीलिए कई प्रतिभागियों ने मेट्रो/पब्लिक ट्रांसपोर्ट, जल्दी निकलने, और कम बैग रखने जैसी व्यावहारिक सलाहें दीं। ऐसे बड़े इवेंट में “अंदर की लाइन” और “बाहर का ट्रैफिक”—दोनों मिलकर पूरे अनुभव को तय करते हैं; और यही बात India AI Impact Summit के पहले दिन में सबसे ज्यादा महसूस हुई।
9) आयोजन का स्केल: 10 एरिना, 70,000+ वर्ग मीटर, 300+ पवेलियन
India AI Impact Summi दिन-1 ऑपरेशंस पर सवाल उठे, लेकिन आयोजन का स्केल बहुत बड़ा बताया जा रहा है। India Today की रिपोर्ट के अनुसार एक्सपो 10 एरिना में 70,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में फैला है और इसमें 300 से अधिक क्यूरेटेड पवेलियन/लाइव डेमो हैं, जिन्हें People, Planet और Progress जैसी थीम्स के तहत रखा गया है।
Hindustan Times की रिपोर्ट में भी इसी तरह के स्केल का जिक्र है—जो बताता है कि यह एक ऐसा मंच है जहाँ सरकार, उद्योग, अकादमिक-रिसर्च और स्टार्टअप्स को एक ही परिसर में समेटने की कोशिश की गई है।
इतना बड़ा स्केल एक तरफ “आकर्षण” बढ़ाता है, दूसरी तरफ “ऑपरेशन” की कठिनाई भी बढ़ाता है। जितने ज्यादा ज़ोन, उतने ज्यादा गेट्स, उतने ज्यादा सुरक्षा-चेक—और उतने ही ज्यादा संभावित bottlenecks।
10) 600+ स्टार्टअप्स: ‘रीयल-वर्ल्ड’ India AI Impact Summi का शोकेस
आयोजन की एक बड़ी खास बात 600 से अधिक हाई-पोटेंशियल स्टार्टअप्स की भागीदारी बताई गई है, जिनमें कई ऐसे समाधान भी हैं जो पहले से वास्तविक सेटिंग्स में लागू हैं।
यही वजह है कि India AI Impact Summit को केवल “भाषण” का मंच नहीं, बल्कि “डिप्लॉय्ड AI” का शोकेस भी माना जा रहा है—जहाँ हेल्थ-टेक, भाषा-टेक, एजुकेशन, एग्री-टेक, गवर्नेंस, क्लाइमेट और इंडस्ट्री-ऑटोमेशन जैसी चीज़ें लाइव दिख सकती हैं।
स्टार्टअप्स के लिए यह मौका इसलिए भी अहम है, क्योंकि एक ही जगह पर सरकारी-संगठन, बड़े कॉर्पोरेट्स और अंतरराष्ट्रीय पार्टनर्स—तीनों मिल जाते हैं। यदि एंट्री और स्टॉल-एक्सेस की समस्या सुधरती है, तो वास्तविक “वैल्यू” इन्हीं बूथ-कन्वर्सेशन्स से निकल सकती है।
11) 13 देश-पवेलियन: ग्लोबल सहयोग का संकेत
रिपोर्ट के अनुसार 13 कंट्री पवेलियन भी मौजूद हैं—ऑस्ट्रेलिया, जापान, रूस, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड्स, स्विट्ज़रलैंड, सर्बिया, एस्टोनिया, ताजिकिस्तान और अफ्रीका (पवेलियन)।
यह अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति बताती है कि AI अब केवल तकनीक नहीं, “सहयोग और प्रतिस्पर्धा” दोनों का क्षेत्र है। भारत जैसे देश के लिए ऐसे मंच तकनीकी-भागीदारी, रिसर्च-कॉलैबोरेशन, स्टैंडर्ड-सेटिंग और निवेश-नेटवर्किंग के अवसर बन सकते हैं। इसलिए India AI Impact Summit के लिए जरूरी है कि अनुभव—एंट्री से लेकर डेमो तक—विश्व-स्तरीय लगे, ताकि साझेदारी की बातचीत किसी “ऑपरेशन इशू” में दब न जाए।
12) “ऑप्टिक्स बनाम एक्ज़ीक्यूशन”: क्यों यह बहस तेज़ हुई?
दिन-1 पर बिल्डर्स ने जो सवाल उठाए, वे सीधे-सीधे “इज्ज़त” और “बराबरी” की भावना से जुड़े थे:
क्या प्रदर्शकों/फाउंडर्स को पहले से पता था कि किस समय एक्सेस सीमित होगा?
क्या सुरक्षा-सवीप के दौरान बूथ-सामान के लिए कोई स्पष्ट SOP था?
क्या स्टाफ के निर्देश एक-दूसरे से समन्वित थे?
क्या कनेक्टिविटी और रजिस्ट्रेशन सिस्टम बड़े दबाव के लिए तैयार थे?
ऐसे सवाल किसी भी बड़े टेक आयोजन को “फेस्टिवल” बनाते हैं या “फ्रस्ट्रेशन”। इसलिए आयोजकों के लिए असली चुनौती अब यह है कि वे दिन-2 से आगे लगातार सुधार दिखाएँ, ताकि चर्चा फिर से इनोवेशन, पॉलिसी और पार्टनरशिप पर लौटे।
13) आगे क्या सुधार दिख सकते हैं: 5 व्यावहारिक कदम
स्पष्ट साइनेंज और ज़ोन-मैप: हर गेट पर “किसके लिए कौन-सी लाइन” का बड़ा बोर्ड; और अंदर प्रमुख ज़ोन तक रंग/कोड आधारित दिशा-निर्देश।
प्रदर्शकों के लिए अलग एक्सेस-कॉरिडोर: ताकि बूथ-होल्डर्स का काम VIP या जनरल लाइन में न फँसे और वे डेमो स्लॉट्स मिस न करें।
सुरक्षा-सवीप SOP: कौन-सा सामान साथ ले जा सकते हैं, कौन-सा अंदर सुरक्षित रहेगा, और कब लौटना है—सब लिखित में; साथ में हेल्पडेस्क/हॉटलाइन।
टेक-इन्फ्रा बैकअप: रजिस्ट्रेशन/स्कैनिंग सिस्टम और Wi-Fi के लिए रेडंडेंसी; भीड़ बढ़ने पर सर्वर-लोड स्केल-अप।
लाइव अपडेट सिस्टम: ऐप/LED स्क्रीन/व्हॉट्सऐप चैनल पर real-time निर्देश, ताकि भ्रम न फैले और लोग लाइनें बार-बार न बदलें।
ये कदम “पहले दिन की चोट” को अगले दिनों में “विश्वसनीयता” में बदल सकते हैं—और यही किसी भी बड़े इवेंट की असली क्षमता होती है। खासकर जब कई प्रदर्शक अपने प्रोडक्ट डेमो से निवेशकों/ग्राहकों को प्रभावित करने आए हों, तब एक स्मूद एंट्री और भरोसेमंद ऑपरेशन उन्हें मंच से जोड़े रखता है।
14) निष्कर्ष: बड़ा मंच, बड़ी उम्मीद—और बड़ी जिम्मेदारी
अंततः, India AI Impact Summit की कसौटी यही है कि यह सिर्फ “बड़ा आयोजन” न रहे, बल्कि बिल्डर्स, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के लिए वास्तव में उपयोगी और सम्मानजनक मंच बने। पहला दिन बताता है कि भारत में AI को लेकर उत्साह बहुत बड़ा है, लेकिन उसी अनुपात में ऑपरेशन और समन्वय भी मजबूत होना चाहिए। अगर आयोजक अगले दिनों में एंट्री, सुरक्षा-समन्वय, स्टॉल-एक्सेस और टेक-इन्फ्रा के मोर्चे पर सुधार साफ दिखा पाए, तो यह आयोजन कठिन शुरुआत के बाद भी वैश्विक AI बातचीत में भारत की भूमिका को मजबूत कर सकता है।
दिन-1 की घटनाएँ एक जरूरी याद दिलाती हैं: बड़े टेक मंच केवल भाषणों से नहीं चलते—वे सूक्ष्म स्तर पर बनाए गए सिस्टम से चलते हैं। क्यू-मैनेजमेंट, बैज-प्रिंटिंग, स्टॉल-एक्सेस, नेटवर्क-कनेक्टिविटी, सूचना-डेस्क और शिकायत-समाधान—यही चीजें किसी प्रतिभागी का अनुभव तय करती हैं। अगर इन मोर्चों पर लगातार सुधार दिखता है, तो प्रदर्शकों की निराशा की जगह फिर से डेमो, साझेदारी और सीखने की बातचीत केंद्र में आ जाएगी। और तब इस आयोजन का असली मूल्य सामने आएगा—यानी भारत के भीतर और बाहर दोनों जगह AI के जिम्मेदार, व्यावहारिक और “इम्पैक्ट-फोकस्ड” उपयोग पर भरोसा बढ़ाना।
India AI Impact Summi आगे की उम्मीदें: अगले दिनों में यदि गेट-मैनेजमेंट और स्टॉल-एक्सेस सुव्यवस्थित हो जाते हैं, तो वही भीड़ इस आयोजन की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है—क्योंकि तब हर लाइन के पीछे एक बातचीत, एक डेमो और एक संभावित सहयोग छिपा होगा। साथ ही, सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन बनाते हुए पारदर्शी संचार (कब, कहाँ, क्यों) यह तय करेगा कि प्रदर्शक खुद को ‘भागीदार’ महसूस करते हैं या ‘बाहरी’। इसी संतुलन में बड़े आयोजनों की विश्वसनीयता और भविष्य की सफलता छिपी होती है।
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