Gold Monetisation Scheme: सरकार जल्द ला सकती है नई योजना
Gold Monetisation Scheme को लेकर केंद्र सरकार जल्द बड़ा फैसला ले सकती है। सूत्रों के अनुसार सरकार अगले दो सप्ताह के भीतर इस योजना का नया और संशोधित संस्करण (Revamped Scheme) घोषित कर सकती है। इस नई पहल का उद्देश्य देशभर में घरों में रखे निष्क्रिय (Idle) सोने को औपचारिक अर्थव्यवस्था में लाना, सोने के आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है।
जानकारों का मानना है कि यदि नई Gold Monetisation Scheme सफल रहती है, तो इससे 1,000 टन से अधिक सोना अर्थव्यवस्था में शामिल किया जा सकता है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत, चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) में कमी और देश की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिल सकती है।
क्या है Gold Monetisation Scheme?
Gold Monetisation Scheme की शुरुआत वर्ष 2015 में केंद्र सरकार द्वारा की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों के घरों और लॉकरों में पड़े निष्क्रिय सोने को बैंकिंग प्रणाली में लाकर उसका आर्थिक उपयोग करना था।
इस योजना के तहत लोग अपना सोना जमा करके उस पर ब्याज प्राप्त कर सकते थे। साथ ही सरकार का लक्ष्य सोने के आयात को कम करना और विदेशी मुद्रा की बचत करना था।
सरकार क्यों कर रही है बदलाव?
पिछले लगभग 10 वर्षों में Gold Monetisation Scheme अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी। मार्च 2025 तक देश में अनुमानित 25,000 टन निजी स्वर्ण भंडार के मुकाबले केवल लगभग 38 टन सोना ही इस योजना के तहत जमा हो सका।
इसी कारण सरकार अब इसमें बड़े बदलाव करने की तैयारी कर रही है।
नई Gold Monetisation Scheme में क्या होगा खास?
सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित नई Gold Monetisation Scheme में सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि अब केवल बैंक ही नहीं, बल्कि देशभर के अधिकृत ज्वैलर्स (Jewellers) भी “Collection Partners” के रूप में काम कर सकेंगे।
इससे लोगों के लिए अपने सोने को योजना में शामिल करना आसान हो जाएगा।
प्रमुख प्रस्तावित बदलाव:
- अधिकृत ज्वैलर्स को कलेक्शन पार्टनर बनाया जाएगा।
- घरों में रखे सोने को आसानी से जमा किया जा सकेगा।
- प्रक्रिया पहले से अधिक सरल होगी।
- अधिक लोगों की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास होगा।
ज्वैलर्स की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण होगी?
ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) का मानना है कि यदि ज्वैलर्स को योजना में शामिल किया जाता है, तो Gold Monetisation Scheme को व्यापक स्तर पर सफलता मिल सकती है।
ज्वैलर्स सीधे ग्राहकों से जुड़े होते हैं, इसलिए लोगों का भरोसा भी अधिक रहेगा।
भारत में कितना सोना है?
भारत दुनिया के सबसे बड़े स्वर्ण उपभोक्ता देशों में शामिल है।
अनुमान है कि भारतीय परिवारों के पास लगभग 25,000 टन सोना मौजूद है।
यदि इसका केवल 5 प्रतिशत भी Gold Monetisation Scheme के तहत आ जाए, तो लगभग 1,250 टन सोना अर्थव्यवस्था में शामिल हो सकता है।
80 से 90 अरब डॉलर की आंतरिक तरलता
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि 5 प्रतिशत निजी सोना योजना में शामिल होता है, तो देश में लगभग 80 से 90 अरब डॉलर की अतिरिक्त आर्थिक तरलता (Liquidity) उत्पन्न हो सकती है।
इससे निवेश, उद्योग और बैंकिंग क्षेत्र को बड़ा लाभ मिल सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी की अपील
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से अपील की थी कि वे एक वर्ष तक नए सोने की खरीद को टालने पर विचार करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अपील और Gold Monetisation Scheme के संभावित बदलाव एक व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं।
पुरानी योजना क्यों नहीं चली?
Gold Monetisation Scheme के सफल न होने के कई कारण बताए जाते हैं।
1. भावनात्मक जुड़ाव
भारतीय परिवारों के लिए आभूषण केवल निवेश नहीं बल्कि पारिवारिक विरासत और धार्मिक आस्था का प्रतीक होते हैं। इसलिए लोग उन्हें पिघलवाने से बचते हैं।
2. कम ब्याज
योजना के तहत मिलने वाला ब्याज कई निवेशकों को आकर्षक नहीं लगा।
3. टैक्स संबंधी आशंकाएं
कई लोगों को पुराने सोने के दस्तावेज और टैक्स जांच का डर था।
4. बैंकों की सीमित रुचि
बैंकों को इस योजना से व्यावसायिक लाभ कम मिलता था, इसलिए इसका प्रचार-प्रसार भी सीमित रहा।
सरकार को भी हुआ नुकसान
विशेषज्ञों के अनुसार पुरानी Gold Monetisation Scheme सरकार के लिए भी महंगी साबित हुई।
सरकार को—
- ब्याज देना पड़ता था।
- सोने की कीमत बढ़ने पर अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता था।
- योजना पूरी तरह हेज (Hedged) नहीं थी।
इन कारणों से सरकारी खर्च बढ़ गया।
आयात पर क्या पड़ेगा असर?
भारत हर वर्ष बड़ी मात्रा में सोने का आयात करता है।
यदि Gold Monetisation Scheme सफल रहती है, तो—
- सोने का आयात कम हो सकता है।
- विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
- चालू खाते का घाटा घट सकता है।
- डॉलर की मांग कम हो सकती है।
- रुपये को मजबूती मिल सकती है।
अर्थव्यवस्था को कैसे मिलेगा लाभ?
नई Gold Monetisation Scheme से कई क्षेत्रों को फायदा मिलने की संभावना है।
- बैंकिंग सेक्टर
- ज्वैलरी उद्योग
- निवेश बाजार
- विदेशी मुद्रा भंडार
- सरकारी वित्तीय स्थिति
विशेषज्ञों का मानना है कि निष्क्रिय सोने को “उत्पादक राष्ट्रीय पूंजी” में बदला जा सकता है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
यदि सरकार नई Gold Monetisation Scheme की घोषणा करती है, तो निवेशकों को योजना के नियम, ब्याज दर, लॉक-इन अवधि और कर संबंधी प्रावधानों को ध्यान से समझना चाहिए।
किसी भी निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार से परामर्श लेना उचित रहेगा।
निष्कर्ष
Gold Monetisation Scheme का प्रस्तावित नया स्वरूप भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। यदि ज्वैलर्स को कलेक्शन पार्टनर बनाया जाता है और प्रक्रिया को सरल किया जाता है, तो लोगों की भागीदारी बढ़ सकती है। इससे घरों में रखा निष्क्रिय सोना आर्थिक गतिविधियों में शामिल होगा, सोने के आयात पर निर्भरता कम होगी और देश की वित्तीय स्थिति को मजबूती मिलेगी।
हालांकि योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार लोगों का भरोसा कैसे जीतती है, प्रक्रिया को कितना आसान बनाती है और निवेशकों को कितना आकर्षक लाभ उपलब्ध कराती है। आने वाले दिनों में Gold Monetisation Scheme से जुड़ी आधिकारिक घोषणा पर सभी की नजरें रहेंगी।
Read More:
1 july Gold Rate: सोना ₹800 सस्ता, चांदी ₹6,000 महंगी, जानिए 7 बड़े अपडेट















Leave a Reply