गांधी की पुण्यतिथि पर Congress leader जयराम रमेश ने उठाए ऐतिहासिक मुद्दे
New Delhi: महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर Congress leader जयराम रमेश ने 1948 में जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा लिखे गए दो महत्वपूर्ण पत्रों का जिक्र किया। ये पत्र भारतीय राजनीति के एक ज्वलंत और विवादास्पद समय में लिखे गए थे, जब महात्मा गांधी की हत्या की साज़िश को लेकर राजनीतिक दलों और संगठनों के बीच तीव्र आलोचना हो रही थी। जयराम रमेश ने इन पत्रों के माध्यम से राष्ट्रवाद के स्व-घोषित संरक्षकों पर कड़ी टिप्पणी की और यह सवाल उठाया कि वर्तमान में एक लोकसभा सदस्य जो उस विचारधारा से जुड़े हैं, कैसे प्रधानमंत्री से आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं, जो गांधी और गोडसे के बीच चुनाव करने की स्थिति का सामना कर रहे थे।
गांधी की पुण्यतिथि पर एक ऐतिहासिक पुनरावलोकन
जयराम रमेश ने अपनी टिप्पणी में 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या के बाद के दिनों की घटनाओं को याद करते हुए बताया कि दो दिन पहले, यानी 28 जनवरी 1948 को, पंडित नेहरू ने स्याम प्रसाद मुखर्जी को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने हिंदू महासभा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की गतिविधियों की निंदा की थी। इस पत्र में नेहरू ने साफ तौर पर कहा था कि महात्मा गांधी के खिलाफ जो भाषण दिए जा रहे थे, वे देश की एकता और अखंडता के लिए खतरे की घंटी हैं।
इसके कुछ महीनों बाद, 18 जुलाई 1948 को, सरदार पटेल ने भी मुखर्जी को एक पत्र भेजा था, जिसमें उन्होंने RSS और हिंदू महासभा की गतिविधियों की आलोचना की थी। इन दोनों पत्रों में Congress leader ने उस समय के राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य और धर्मनिरपेक्षता की आवश्यकता को स्पष्ट किया था।
Congress leader जयराम रमेश का बयान
जयराम रमेश ने इस संदर्भ में कहा, “ये दोनों पत्र राष्ट्रवाद के स्व-घोषित संरक्षकों के लिए बहुत कड़ी आलोचना हैं। और यह सोचिए कि आज एक लोकसभा सांसद जो उस विचारधारा से जुड़े हुए हैं, और जिन्हें प्रधानमंत्री का आशीर्वाद प्राप्त है, गांधी और गोडसे के बीच चुनाव करने की बात करते हैं। उनके मंत्रीमंडल के सदस्य अपने बयान में यह कहते हैं कि उन्हें गांधी और गोडसे में से किसी एक को चुनने में कठिनाई हो रही है।”
रमेश ने यह भी साझा किया कि नेहरू के पत्र में यह उल्लेख किया गया था कि हिंदू महासभा पुणे, अहमदनगर और दिल्ली में बैन के बावजूद बैठकें आयोजित कर रही थी। इन बैठकों में यह कहा गया कि महात्मा गांधी एक रुकावट हैं और जितनी जल्दी वे मरे उतना देश के लिए अच्छा होगा। नेहरू ने यह भी कहा था कि RSS की गतिविधियाँ इससे भी ज्यादा आपत्तिजनक हैं, और उनके खिलाफ जानकारी इकट्ठा की जा रही है।
सरदार पटेल का पत्र
रमेश ने सरदार पटेल के पत्र का भी उल्लेख किया, जिसमें पटेल ने RSS और हिंदू महासभा के कार्यों की आलोचना की थी। पटेल ने लिखा था कि गांधी के खिलाफ नफरत फैलाने वाली विचारधारा को बढ़ावा दिया जा रहा था, और यह देश के लिए खतरनाक हो सकता था। इन पत्रों ने उस समय के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य को स्पष्ट किया था, जिसमें नेहरू और पटेल दोनों ने मिलकर भारत की धर्मनिरपेक्षता और अखंडता की रक्षा के लिए अपने दृष्टिकोण और कदमों का पालन किया।
Congress leader के आक्षेप
जयराम रमेश ने यह आरोप भी लगाया कि वर्तमान सरकार ने उस विचारधारा को स्वीकार किया है, जो महात्मा गांधी की हत्या के बाद उभरी थी। उन्होंने यह कहा कि गांधी और गोडसे के बीच चयन करने की बात करना देश के साथ विश्वासघात के बराबर है। उनके अनुसार, यह एक ऐसी सोच का हिस्सा है, जो राष्ट्रीय एकता और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है।
जयराम रमेश की आलोचना का असर
रमेश की यह आलोचना उस समय की राजनीतिक स्थिति और कांग्रेस के दृष्टिकोण को उजागर करती है। Congress leader ने यह भी साझा किया कि वह इन पत्रों के माध्यम से यह बताना चाहते थे कि राष्ट्रवाद का असली रूप क्या होना चाहिए, और यह कि हर व्यक्ति को धर्मनिरपेक्षता की अहमियत समझनी चाहिए।
Congress leader की वर्तमान स्थिति
जयराम रमेश ने यह भी कहा कि आज भी कुछ लोग ऐसी विचारधारा का समर्थन करते हैं, जो गांधी और उनके सिद्धांतों के खिलाफ है। वह यह मानते हैं कि यह राष्ट्रवाद की परिभाषा को बदलने की कोशिश है, और इसके खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि गांधी और गोडसे के बीच चयन करने की बात करना, यह दिखाता है कि वर्तमान समय में कुछ लोग गांधी की सोच से कितना दूर हैं।
Congress leader और उनके विचार
कांग्रेस पार्टी के लिए जयराम रमेश का यह बयान केवल एक ऐतिहासिक संदर्भ नहीं है, बल्कि वर्तमान समय में हो रहे राजनीतिक घटनाक्रमों पर भी एक टिप्पणी है। उनका कहना है कि गांधी की विचारधारा को समझने और उसे लागू करने की जरूरत है, खासकर जब देश में ऐसी ताकतें सक्रिय हैं जो गांधी और उनके विचारों के खिलाफ हैं। वह यह भी मानते हैं कि गांधी और गोडसे के बीच किसी एक का चयन करना केवल ऐतिहासिक संदर्भ नहीं, बल्कि वर्तमान में राष्ट्रीय राजनीति का एक हिस्सा बन चुका है।
निष्कर्ष
जयराम रमेश का यह बयान गांधी के प्रति सम्मान और उनके सिद्धांतों के पालन की आवश्यकता को दर्शाता है। उनका यह कहना कि “Congress leader” और गांधी की विचारधारा के बीच की खाई को पाटना आवश्यक है, यह एक स्पष्ट संदेश है कि भारत को धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रीय एकता की दिशा में अपने कदम जारी रखने की जरूरत है। उनके शब्दों में यह संदेश न केवल वर्तमान सरकार के लिए है, बल्कि भारतीय समाज के हर एक वर्ग के लिए है, जो गांधी की विचारधारा से प्रेरित होकर एक मजबूत और समृद्ध राष्ट्र की दिशा में कार्य कर सकते हैं।
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