Vaa Vaathiyaar Movie Review: Karthi के सुपरहीरो ड्रामा में फंसी अनकही कहानी
दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के नामी डायरेक्टर नलन कुमारासामी ने अपनी नई फिल्म “Vaa Vaathiyaar” के साथ एक नई दिशा में कदम रखा है। फिल्म में कार्थी, सथ्याराज और कृति शेट्टी मुख्य भूमिका में हैं। यह फिल्म एक अनोखा कॉमेडी और सुपरहीरो ड्रामा है, जो दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। हालांकि फिल्म की शुरूआत तो शानदार है, लेकिन अंत में यह अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच पाती।
फिल्म की कहानी:
Vaa Vaathiyaar” की कहानी रामु (कार्थी) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक साधारण आदमी से लेकर एक भ्रष्ट पुलिस अफसर बनता है। रामु का जन्म उसी दिन और समय हुआ था जब तमिलनाडु के मशहूर नेता एमजी रामचंद्रन (एमजीआर) का हुआ था। रामु का पालन पोषण उसके दादा (राजकिरण) ने एमजीआर के आदर्शों पर किया था। फिल्म में रामु की ज़िंदगी में एक मोड़ आता है जब वह अपनी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्य से कुछ खो देता है। इस नुकसान के बाद उसकी ज़िंदगी में एक बड़ा बदलाव आता है और उसे अपने अंदर एक नया व्यक्तित्व महसूस होता है।
फिल्म में इस परिवर्तन के साथ रामु एक सुपरहीरो जैसा महसूस करता है। यहां फिल्म में एक खास पहलू देखा गया है जब रामु अपने दादा द्वारा बताए गए आदर्शों को अपना कर एमजीआर की तरह कार्य करने की कोशिश करता है। यही विचार उसे अपने अंदर के बदलाव को स्वीकार करने में मदद करता है।
फिल्म की समीक्षा:
नलन कुमारासामी, जिनकी पिछली फिल्म “कधलुम कदांधु पोगुम” ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा था, इस बार एक अलग शैली में फिल्म बना रहे हैं। “Vaa Vaathiyaar” में उन्होंने सुपरहीरो की कहानी को कॉमिक ड्रामा के साथ मिश्रित किया है।
कास्ट और अभिनय:
Vaa Vaathiyaar: फिल्म के मुख्य अभिनेता कार्थी का प्रदर्शन अद्वितीय रहा है। उन्होंने रामु के रूप में अपनी भूमिका को पूरी तरह से जिया है और इस भूमिका में उनका व्यक्तित्व साफ दिखाई देता है। उनका किरदार हर मोड़ पर बदलता है, और हर परिवर्तन को वे बड़ी सहजता से निभाते हैं। फिल्म के पहले हिस्से में कार्थी के अभिनय से फिल्म को एक नई दिशा मिलती है। खासतौर पर, जब वह एमजीआर के व्यक्तित्व का अनुकरण करते हैं, तो दर्शकों को एक अनोखा अनुभव मिलता है।
सथ्याराज ने भी अपने किरदार में गहरी छाप छोड़ी है। उनका अभिनय ठोस और प्रभावशाली रहा है, जिसमें उन्होंने पैसे की तृष्णा और सत्ता की ललक को बखूबी प्रस्तुत किया है। कृति शेट्टी, जो रामु के साथ सहयोगी बनती हैं, उनका किरदार फिल्म के मुख्य तत्व से जुड़ा है, लेकिन उन्हें स्क्रीन पर ज्यादा समय नहीं मिला। उनका अभिनय ठीक था, लेकिन फिल्म में उनके किरदार को और मजबूत किया जा सकता था।
फिल्म की कमजोरियां:
“Vaa Vaathiyaar” की सबसे बड़ी कमजोरी इसके दूसरे हिस्से में दिखती है। जहां पहले आधे घंटे में फिल्म ने शानदार शुरुआत की, वहीं दूसरे हिस्से में कहानी थोड़ी सुस्त हो जाती है। फिल्म का केंद्रीय विचार, रामु के मानसिक बदलाव और उसके अंदर के सुपरहीरो व्यक्तित्व को पर्याप्त रूप से गहराई से नहीं दर्शाया गया। फिल्म अपनी शुरुआती अवधारणा को बरकरार रखने में असफल रही और दूसरी ओर कहानी में घटनाएं केवल सतही तौर पर दिखाई देती हैं।
फिल्म का समापन भी जल्दबाजी में किया गया है। फिल्म के क्लाइमेक्स में जितनी अहमियत और गहराई होनी चाहिए थी, वह नहीं दिखी। यह संदेह पैदा करता है कि फिल्म के अंत को जल्दबाजी में निपटाया गया।
संगीत और बैकग्राउंड स्कोर:
फिल्म का संगीत संतोष नारायण द्वारा दिया गया है, जो कि कुछ हद तक प्रभावी रहा है। गाने और बैकग्राउंड स्कोर से फिल्म की कुछ महत्वपूर्ण क्षणों को बल मिला है, खासकर जब रामु का सुपरहीरो के रूप में परिवर्तन होता है। हालांकि, गाने कभी-कभी फिल्म की गति को धीमा करते हैं, जो कि अन्य दृश्यों में जरूरी नहीं था।
निष्कर्ष:
कुल मिलाकर, “Vaa Vaathiyaar” एक दिलचस्प और अनोखी फिल्म है, जिसमें फिल्म के निर्माता नलन कुमारासामी ने एक नई दिशा में कदम रखा है। फिल्म में कार्थी की शानदार अभिनय के साथ-साथ फिल्म का मस्तिष्की रूप से दिलचस्प प्लॉट है। हालांकि, फिल्म अपने शुरूआती विचारों को बढ़ाते हुए अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच पाती, और कहानी का विकास धीमा हो जाता है।
“Vaa Vaathiyaar” के निर्देशक नलन कुमारासामी की यह फिल्म एक बड़ी उम्मीद थी, लेकिन अंत में यह पूरी तरह से उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाती। फिर भी, कार्थी का प्रदर्शन और पहले आधे घंटे की सशक्त कहानी इसे देखने योग्य बनाती है।
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