17 फरवरी को लगेगा साल का पहला सूर्य ग्रहण: जानिए पूरी जानकारी
दुनिया भर के खगोल प्रेमियों के लिए आज का दिन बेहद खास है, क्योंकि Solar eclipse on February 17 यानी 17 फरवरी को साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण लग रहा है। यह एक वलयाकार सूर्यग्रहण (Annular Solar Eclipse) है, जिसे आम भाषा में “रिंग ऑफ फायर” कहा जाता है। जब यह खगोलीय घटना अपने चरम पर पहुंचेगी, तब आकाश में ऐसा लगेगा मानो सूर्य के चारों ओर आग का चमकता हुआ छल्ला बना हुआ है।
Solar eclipse on February 17 खगोल विज्ञान की दृष्टि से बेहद रोमांचक है क्योंकि यह पूर्ण सूर्यग्रहण नहीं बल्कि वलयाकार ग्रहण है। इसका मतलब है कि चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढंक नहीं पाएगा, बल्कि उसके केंद्र को ढकते हुए किनारों पर चमकती हुई रिंग छोड़ देगा।
🌍 Solar eclipse on February 17 क्या है और यह कैसे होता है?
Solar eclipse on February 17 तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है। लेकिन इस बार चंद्रमा पृथ्वी से थोड़ी अधिक दूरी पर रहेगा। चूंकि वह पृथ्वी से दूर होगा, इसलिए उसका आकार सूर्य से छोटा दिखाई देगा। यही कारण है कि सूर्य पूरी तरह से ढकेगा नहीं और उसके किनारे चमकते हुए दिखाई देंगे।
वलयाकार सूर्यग्रहण तब बनता है जब चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर गिरती है लेकिन उसका अंब्रा (Umbra) पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाता। इसके बजाय एंटम्ब्रा (Antumbra) पृथ्वी पर गिरती है और हमें सूर्य के चारों ओर रिंग दिखाई देती है।
इसी वजह से Solar eclipse on February 17 को “Ring of Fire” कहा जा रहा है।
🌎 कहां दिखाई देगा Solar eclipse on February 17?
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है—क्या Solar eclipse on February 17 भारत में देखा जा सकेगा?
दुर्भाग्यवश, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।
हालांकि इसे निम्न क्षेत्रों में देखा जा सकेगा:
अंटार्कटिका (रिंग ऑफ फायर का मुख्य दृश्य)
दक्षिण अफ्रीका के कुछ हिस्से
दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी भाग
हिंद महासागर के कुछ क्षेत्र
अंटार्कटिका में बर्फीले मैदानों के ऊपर जब Solar eclipse on February 17 दिखाई देगा, तो वह दृश्य बेहद दुर्लभ और मनमोहक होगा।
🌡 मौसम और दृश्यता
वॉशिंगटन और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में मौसम साफ रहने की संभावना है।
अंटार्कटिका में हालांकि ठंडक चरम पर होगी, लेकिन आसमान साफ रहने की उम्मीद की जा रही है।
क्योंकि Solar eclipse on February 17 दिन के समय लगेगा, इसलिए जहां-जहां यह दिखाई देगा वहां विशेष चश्मों की जरूरत होगी।
👓 सुरक्षा क्यों जरूरी है?
विशेषज्ञों के अनुसार, Solar eclipse on February 17 को बिना सुरक्षा उपकरणों के सीधे देखना आंखों के लिए खतरनाक हो सकता है।
सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य की किरणें और भी तीखी लगती हैं।
इसलिए:
ISO प्रमाणित सोलर ग्लास का उपयोग करें
कैमरे या दूरबीन बिना फिल्टर के उपयोग न करें
बच्चों को विशेष निगरानी में रखें
🔭 वैज्ञानिक दृष्टिकोण
Solar eclipse on February 17 सिर्फ एक दृश्य चमत्कार नहीं है बल्कि वैज्ञानिकों के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर है।
इस दौरान वे अध्ययन करेंगे:
सूर्य के कोरोना की संरचना
वायुमंडलीय तापमान में बदलाव
जानवरों के व्यवहार में परिवर्तन
आयनमंडल पर प्रभाव
वलयाकार ग्रहण के दौरान वैज्ञानिक सूर्य की बाहरी परतों का विश्लेषण करते हैं, जो सामान्य समय में संभव नहीं होता।
🌕 अब बारी चंद्रग्रहण की
Solar eclipse on February 17 के ठीक दो सप्ताह बाद 3 मार्च को पूर्ण चंद्रग्रहण लगेगा।
सूर्य ग्रहण के विपरीत, चंद्रग्रहण बिना किसी विशेष उपकरण के देखा जा सकता है।
जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आती है, तो उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है।
पृथ्वी की छाया दो भागों में होती है:
पेनम्ब्रा (हल्की छाया)
अंब्रा (गहरी छाया)
जब चंद्रमा पूरी तरह अंब्रा में चला जाता है, तब वह लाल या नारंगी रंग का दिखाई देता है—जिसे “ब्लड मून” कहा जाता है।
🇮🇳 भारत में चंद्रग्रहण
जहां Solar eclipse on February 17 भारत में नहीं दिखेगा, वहीं 3 मार्च को लगने वाला चंद्रग्रहण भारत के कई हिस्सों में साफ दिखाई देगा।
भारत सहित:
पूर्वी एशिया
ऑस्ट्रेलिया
उत्तरी अमेरिका
इन क्षेत्रों में लोग इसे आसानी से देख पाएंगे।
🔮 क्या हैं ज्योतिषीय मान्यताएं?
हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण अलग है, लेकिन Solar eclipse on February 17 को लेकर ज्योतिषीय मान्यताएं भी प्रचलित हैं।
कुछ लोग इसे शुभ-अशुभ संकेत से जोड़ते हैं।
हालांकि आधुनिक विज्ञान इन धारणाओं की पुष्टि नहीं करता।
🏁 निष्कर्ष
Solar eclipse on February 17 साल 2026 की पहली बड़ी खगोलीय घटना है।
हालांकि यह भारत में नहीं दिखाई देगा, लेकिन दुनिया के कई हिस्सों में इसे देखा जा सकेगा।
इस वलयाकार सूर्यग्रहण के दौरान “रिंग ऑफ फायर” का अद्भुत दृश्य खगोल प्रेमियों को रोमांचित करेगा।
इसके तुरंत बाद आने वाला चंद्रग्रहण भारत के लिए और भी खास होगा।
इस प्रकार, Solar eclipse on February 17 न केवल वैज्ञानिकों बल्कि आम लोगों के लिए भी उत्साह और जिज्ञासा का विषय बना हुआ है। 🌞🌕
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