Wednesday February 11 तेलंगाना नगर निकाय चुनाव 2026: मतदान से पहले सियासी संग्राम तेज
तेलंगाना में नगर निकाय चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियाँ अपने चरम पर पहुँच चुकी हैं। राज्य में 116 नगरपालिकाओं और 7 नगर निगमों में होने वाला यह चुनाव केवल स्थानीय सरकार चुनने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे राज्य और केंद्र की राजनीति का बड़ा सेमीफाइनल माना जा रहा है। मतदान Wednesday February 11 को होना है और इससे पहले सरकार, प्रशासन और राजनीतिक दल पूरी ताकत झोंक चुके हैं।
मतदान के लिए घोषित अवैतनिक नहीं, बल्कि ‘पेड हॉलिडे’
तेलंगाना सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए Wednesday February 11 को राज्य के नगर निकाय क्षेत्रों में कार्यरत सभी फैक्ट्रियों, दुकानों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और निजी संस्थानों के कर्मचारियों को पेड हॉलिडे घोषित किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी मतदाता अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित न रहे। सरकार का मानना है कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब शहरी मतदाता बड़ी संख्या में वोटिंग करें।
इस फैसले का श्रमिक संगठनों और नागरिक समूहों ने स्वागत किया है। लंबे समय से यह मांग की जा रही थी कि शहरी क्षेत्रों में कामकाजी वर्ग मतदान के कारण अपनी नौकरी या मजदूरी न खोए।
चुनावी माहौल और प्रचार सामग्री हटाने की प्रक्रिया
चुनाव आयोग के निर्देशानुसार मतदान से 48 घंटे पहले चुनाव प्रचार पर रोक लगने के बाद सोमवार को राज्यभर में बैनर, पोस्टर और होर्डिंग हटाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई। नगर निगमों, नगरपालिकाओं और पुलिस की संयुक्त टीमों ने सड़कों पर लगे प्रचार सामग्री को हटाया ताकि आदर्श आचार संहिता का सख्ती से पालन हो।
प्रशासन ने साफ किया है कि Wednesday February 11 को मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराया जाएगा। इसके लिए अतिरिक्त पुलिस बल, होम गार्ड्स और क्यूआरटी टीमों की तैनाती की गई है।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का बड़ा सियासी हमला
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने नगर निकाय चुनावों को केंद्र की भाजपा और राज्य की बीआरएस सरकार के खिलाफ जनमत संग्रह बताते हुए इसे “सीधा फैसला” करार दिया है। उन्होंने कहा कि Wednesday February 11 के चुनाव कांग्रेस, बीआरएस और भाजपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबले में बदल चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने शहरी मतदाताओं से “भावनात्मक मुद्दों” में न उलझकर विकास के आधार पर वोट देने की अपील की। उनके मुताबिक पिछले एक दशक में न तो केंद्र सरकार और न ही पूर्ववर्ती राज्य सरकार ने शहरी बुनियादी ढांचे को वह प्राथमिकता दी जिसकी जरूरत थी।
भाजपा और बीआरएस पर गंभीर आरोप
रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया कि भाजपा और बीआरएस के बीच “क्विड प्रो क्वो” की राजनीति चल रही है। उनका दावा है कि इसी कारण कई बड़े घोटालों में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर दोनों दल इतने साल सत्ता में रहे, तो शहरी समस्याएँ आज भी क्यों बनी हुई हैं?
मुख्यमंत्री ने मतदाताओं से अपील की कि Wednesday February 11 को वे पिछले 12 साल की केंद्र सरकार और 10 साल की बीआरएस सरकार के कार्यकाल का लेखा-जोखा जरूर करें।
कांग्रेस का शहरी विकास एजेंडा
कांग्रेस सरकार ने नगर निकायों के लिए व्यापक मास्टर प्लान का वादा किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर शहरी स्थानीय निकाय (ULB) के लिए अलग विकास योजना तैयार की जाएगी, जिसमें—
-
पीने के पानी की सतत आपूर्ति
-
सीवरेज और ड्रेनेज नेटवर्क
-
निर्बाध बिजली आपूर्ति
-
चौड़ी और गुणवत्तापूर्ण सड़कें
-
सार्वजनिक परिवहन और हरित क्षेत्र
को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि Wednesday February 11 को कांग्रेस को मिला जनादेश शहरी प्रशासन को नई दिशा देगा।
सामाजिक प्रतिनिधित्व पर कांग्रेस का फोकस
रेवंत रेड्डी ने कांग्रेस द्वारा दिए गए टिकटों का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी ने 61% उम्मीदवार पिछड़े वर्गों से उतारे हैं। उनका कहना है कि शहरी राजनीति में सामाजिक संतुलन जरूरी है ताकि विकास का लाभ हर वर्ग तक पहुंचे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र से अगर पर्याप्त फंड नहीं मिलता है, तो राज्य सरकार अपने संसाधनों से शहरी परियोजनाओं को पूरा करेगी।
प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्रियों से सवाल किया कि तेलंगाना को विशेष पैकेज या राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा क्यों नहीं मिला। उन्होंने दावा किया कि भाजपा नेता केवल चुनाव प्रचार के लिए आते हैं लेकिन राज्य के लिए ठोस घोषणाएँ नहीं करते।
रेवंत रेड्डी ने कहा कि Wednesday February 11 को होने वाला मतदान इस सवाल का जवाब देगा कि शहरी मतदाता केंद्र सरकार के रवैये से कितने संतुष्ट हैं।
दक्षिणी राज्यों के साथ भेदभाव का आरोप
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर दक्षिणी राज्यों के साथ वित्तीय भेदभाव का आरोप लगाया। उनका कहना है कि तेलंगाना केंद्र को जो टैक्स देता है, उसके मुकाबले वापस मिलने वाली राशि बहुत कम है। उन्होंने आंकड़ों के जरिए यह दिखाने की कोशिश की कि उत्तरी राज्यों को अनुपात में ज्यादा फंड मिल रहा है।
उनका कहना है कि Wednesday February 11 का चुनाव केवल नगर निकाय चुनने का नहीं, बल्कि राज्य के आत्मसम्मान का सवाल भी है।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारी
चुनाव आयोग ने बताया कि मतदान केंद्रों पर सीसीटीवी निगरानी, वेबकास्टिंग और माइक्रो-ऑब्जर्वर की व्यवस्था की गई है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात रहेंगे।
अधिकारियों के अनुसार Wednesday February 11 को मतदान प्रक्रिया सुबह से शाम तक पूरी पारदर्शिता और शांति के साथ चलेगी।
त्रिकोणीय मुकाबले में किसका पलड़ा भारी?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शहरी वोटर इस बार बेहद सतर्क है। बीआरएस अपनी पूर्व सरकार के कामकाज के आधार पर वोट मांग रही है, भाजपा केंद्र की योजनाओं का हवाला दे रही है, जबकि कांग्रेस राज्य में दो साल के काम को आगे रख रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि Wednesday February 11 का परिणाम भविष्य की विधानसभा और लोकसभा राजनीति की दिशा भी तय कर सकता है।
निष्कर्ष
तेलंगाना के नगर निकाय चुनाव 2026 केवल स्थानीय शासन का चुनाव नहीं रह गए हैं। यह सत्ता, विकास, फंडिंग, सामाजिक न्याय और राजनीतिक भविष्य से जुड़ा बड़ा मुकाबला बन चुका है। मतदान Wednesday February 11 को होना है और उस दिन शहरी मतदाता तय करेगा कि वह किस नेतृत्व और किस सोच के साथ आगे बढ़ना चाहता है।
अब सबकी नजरें केवल एक दिन पर टिकी हैं — Wednesday February 11 — जब तेलंगाना की शहरी राजनीति का अगला अध्याय लिखा जाएगा।
Read More:
Chief Minister of Assam का 1 बड़ा ऐलान, फाइनल वोटर लिस्ट जारी
