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ToggleUP Electoral Roll में बड़ी गिरावट, 2.89 करोड़ नाम हुए हटा: जानें पूरा विवरण
UP Electoral Roll : भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 6 जनवरी 2026 को उत्तर प्रदेश की संशोधित चुनावी सूची (UP Electoral Roll) का ड्राफ्ट जारी किया, जिसमें विशेष तीव्र पुनरीक्षण (SIR) के दौरान लगभग 2.89 करोड़ नाम हटा दिए गए। इस संशोधन के बाद उत्तर प्रदेश के चुनावी सूची में कुल 12.55 करोड़ मतदाता रह गए हैं, जबकि पहले यह संख्या 15.44 करोड़ थी। इसका मतलब है कि लगभग 18.7 प्रतिशत मतदाताओं का नाम सूची से हटा दिया गया है, यानी हर पांच में से एक मतदाता का नाम अब नहीं रहेगा।
यूपी चुनावी सूची में नाम हटाने का कारण
निर्वाचन आयोग के मुताबिक, सूची से जो नाम हटाए गए हैं उनमें मृतकों के नाम, स्थानांतरण होने वाले मतदाता और डुप्लिकेट नाम शामिल हैं। सबसे बड़ा हिस्सा मृतकों का है, जिनके नाम लगभग 46.23 लाख (2.99 प्रतिशत) थे। इसके अलावा, लगभग 2.17 करोड़ मतदाताओं (14.06 प्रतिशत) को स्थानांतरित होने के कारण हटा दिया गया, जबकि 25.46 लाख नाम (1.65 प्रतिशत) डुप्लिकेट पाए गए और हटाए गए।
5 जनवरी से 6 फरवरी तक दावे और आपत्तियाँ
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि जो पात्र मतदाता अपना नाम चुनावी सूची से हटने के बाद पुनः जोड़ना चाहते हैं, वे दावे और आपत्तियाँ दर्ज कर सकते हैं। दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक चलेगी। इस दौरान, उम्मीदवारों को फॉर्म-6 के साथ एक घोषणा पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना दावा प्रस्तुत करना होगा।
उत्तर प्रदेश में नाम हटाने का कारण और प्रक्रिया
UP Electoral Roll चुनावी सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने कहा कि यह कदम विशेष तीव्र पुनरीक्षण (SIR) के तहत उठाया गया है, जिसमें पहले मृतक मतदाताओं, स्थानांतरित मतदाताओं और डुप्लिकेट नामों की पहचान की गई थी। इससे पहले, 27 अक्टूबर 2025 को प्रकाशित सूची में 15.44 करोड़ मतदाता थे, लेकिन 26 दिसंबर 2025 तक किए गए पुनरीक्षण के बाद इनकी संख्या घटकर 12.55 करोड़ रह गई है। यह गिरावट लगभग 18.7 प्रतिशत है, जो मतदान प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है।
क्या है विशेष तीव्र पुनरीक्षण (SIR)?
विशेष तीव्र पुनरीक्षण (SIR) एक प्रक्रिया है, जिसमें चुनावी सूची में नामों की सटीकता को सुनिश्चित करने के लिए हर पांच साल में एक बार व्यापक पुनरीक्षण किया जाता है। इस प्रक्रिया में न केवल मृतक मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं, बल्कि स्थानांतरित होने वाले मतदाताओं और डुप्लिकेट नामों की पहचान भी की जाती है। इस बार SIR प्रक्रिया में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया कि अधिकतम सटीकता सुनिश्चित की जाए, ताकि केवल पात्र मतदाताओं का ही नाम चुनावी सूची में हो।
क्या हैं अन्य राज्यों के आंकड़े?
हाल ही में निर्वाचन आयोग ने तमिलनाडु और गुजरात राज्यों में भी SIR की प्रक्रिया पूरी की, जिसके बाद तमिलनाडु में 97 लाख और गुजरात में 74 लाख नामों को हटा दिया गया। असम में भी विशेष नामांकन के बाद 10.56 लाख नाम हटाए गए। इस प्रकार, भारत के विभिन्न राज्यों में चुनावी सूची की सटीकता को बढ़ाने के लिए यह पुनरीक्षण प्रक्रिया लगातार जारी है।
यूपी चुनावी सूची के महत्त्वपूर्ण आंकड़े
UP Electoral Roll से भी 2025 में पुनरीक्षण के बाद 1.5 करोड़ नाम हटा दिए गए थे, जबकि मध्य प्रदेश में भी इस प्रक्रिया को लागू किया गया था। इन सब बातों से यह स्पष्ट होता है कि निर्वाचन आयोग का उद्देश्य चुनावी सूची में केवल वास्तविक और पात्र मतदाताओं का नाम जोड़ना है। इससे मतदान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने में मदद मिलती है।
क्या है चुनावी सूची से संबंधित भविष्य की प्रक्रिया?
अब तक जो नाम हटाए गए हैं, वे निश्चित रूप से निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित मानदंडों के तहत किए गए थे। लेकिन इस दौरान किसी मतदाता के नाम का हटना अगर गलती से हुआ है तो वह अपनी आपत्ति दर्ज कर सकता है। इसके बाद, जो नाम सही पाए जाएंगे, उन्हें फिर से चुनावी सूची में जोड़ा जाएगा। साथ ही, मतदान की प्रक्रिया में होने वाली किसी भी गड़बड़ी को सुधारने के लिए आयोग द्वारा उचित कदम उठाए जाएंगे।
निष्कर्ष
UP Electoral Roll में की गई यह गिरावट आगामी चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है। हालांकि यह कदम जरूरी था, लेकिन अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदान प्रक्रिया पर इसका कितना असर पड़ता है और इसे लेकर मतदाता कितनी जागरूकता दिखाते हैं। इस प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन आयोग की पारदर्शिता और तत्परता को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, जो देश में लोकतंत्र को और मजबूत करने का कार्य कर रही है।
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