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Shambhu Border: दिल्ली मार्च रोका गया, भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर किसानों का बड़ा विरोध | 7 अहम बातें

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 Shambhu Border: पर फिर किसानों का प्रदर्शन: दिल्ली मार्च रोका गया, भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में किसान महापंचायत का ऐलान

पंजाब और हरियाणा की सीमा पर स्थित shambhu border एक बार फिर किसानों के आंदोलन का केंद्र बन गया है। मंगलवार को पंजाब से बड़ी संख्या में किसान दिल्ली की ओर कूच कर रहे थे, लेकिन हरियाणा पुलिस ने उन्हें shambhu border पर ही रोक दिया। किसान राष्ट्रीय राजधानी में प्रस्तावित भारत-अमेरिका (India-US) व्यापार समझौते के विरोध में आयोजित किसान महापंचायत में शामिल होने जा रहे थे। पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स के कारण किसानों का मार्च आगे नहीं बढ़ सका, जिसके बाद उन्होंने वहीं धरना शुरू कर दिया।

किसान संगठनों का आरोप है कि उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जाकर अपनी बात रखने का लोकतांत्रिक अधिकार नहीं दिया गया। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा के आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।


फिर चर्चा में आया शंभू बॉर्डर

साल 2024 के “दिल्ली चलो-2” आंदोलन की तरह एक बार फिर shambhu border पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। हरियाणा पुलिस ने सीमा पर कई स्तरों की बैरिकेडिंग, लोहे के अवरोधक और सुरक्षा व्यवस्था लागू कर किसानों के काफिलों को आगे बढ़ने से रोक दिया।

इस दृश्य ने पिछले किसान आंदोलन की यादें ताजा कर दीं, जब इसी सीमा को किले जैसी सुरक्षा व्यवस्था में बदल दिया गया था।


दिल्ली क्यों जा रहे थे किसान?

इस बार किसानों का मुख्य मुद्दा प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता (India-US Trade Agreement) है।

देश बचाओ मोर्चा (Desh Bachao Morcha) के बैनर तले पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के किसान संगठनों ने दिल्ली में किसान महापंचायत आयोजित करने का निर्णय लिया था। इसी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए किसान shambhu border पार कर दिल्ली जाना चाहते थे।


किसानों की क्या हैं मुख्य मांगें?

किसानों का कहना है कि प्रस्तावित व्यापार समझौते का सबसे अधिक असर भारतीय कृषि और डेयरी क्षेत्र पर पड़ेगा।

उनकी प्रमुख मांगें हैं—

इन्हीं मांगों को लेकर किसान shambhu border से दिल्ली की ओर मार्च कर रहे थे।


किन संगठनों ने लिया हिस्सा?

कई किसान संगठनों ने इस आंदोलन में भाग लिया।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

इन सभी संगठनों के काफिले पंजाब के विभिन्न जिलों से रवाना हुए, लेकिन उन्हें shambhu border पर रोक दिया गया।


किसान नेताओं का आरोप

बीकेयू शहीद भगत सिंह के नेता तेजवीर सिंह ने आरोप लगाया कि हरियाणा पुलिस ने पंजाब की सीमा के भीतर बैरिकेडिंग की है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पंजाब सरकार इस पूरे मामले में मूकदर्शक बनी रही और किसानों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।

उनके अनुसार shambhu border को एक बार फिर आंदोलन स्थल में बदल दिया गया है।


हरियाणा के किसान पहुंचे दिल्ली

जहां पंजाब के किसानों को shambhu border पर रोक दिया गया, वहीं हरियाणा के कई जिलों जैसे अंबाला, कुरुक्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों से किसान दिल्ली की ओर आगे बढ़ते रहे।

इससे आंदोलन दो हिस्सों में बंटता दिखाई दिया, जहां एक ओर पंजाब के किसान सीमा पर रुके रहे और दूसरी ओर हरियाणा के किसान महापंचायत में शामिल होने के लिए आगे बढ़ गए।


भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर क्यों है विरोध?

किसान नेताओं का कहना है कि फरवरी 2026 में जारी भारत-अमेरिका संयुक्त बयान के अनुसार दोनों देश बहु-क्षेत्रीय द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण पर काम कर रहे हैं।

किसानों का मानना है कि यह केवल व्यापार समझौता नहीं बल्कि कृषि, डेयरी, डिजिटल व्यापार, ई-कॉमर्स, निवेश, सरकारी खरीद, बौद्धिक संपदा अधिकार और सेवा क्षेत्र तक प्रभाव डाल सकता है।

इसी कारण shambhu border पर प्रदर्शन कर रहे किसान इस समझौते को लेकर गंभीर चिंता जता रहे हैं।


किसानों को किस बात का डर है?

किसान संगठनों का कहना है कि यदि भारत का बाजार अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पादों के लिए अधिक खोल दिया गया, तो भारतीय छोटे और सीमांत किसान प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे।

उन्होंने विशेष रूप से इन उत्पादों का उल्लेख किया—

किसानों का कहना है कि अमेरिकी कृषि क्षेत्र को भारी सब्सिडी मिलती है, जिससे भारतीय किसानों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाएगा।


डेयरी सेक्टर पर असर की आशंका

किसान संगठनों के अनुसार भारत का डेयरी क्षेत्र लगभग 8 करोड़ ग्रामीण परिवारों की आजीविका से जुड़ा हुआ है।

यदि व्यापार समझौते के कारण विदेशी डेयरी उत्पादों का आयात बढ़ता है तो इसका असर केवल दूध उत्पादकों पर ही नहीं बल्कि—

पर भी पड़ सकता है।

इसी मुद्दे को लेकर shambhu border पर किसानों ने केंद्र सरकार से पारदर्शिता की मांग की है।


सरकार से किसानों की अपील

देश बचाओ मोर्चा ने केंद्र सरकार से मांग की है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं।

साथ ही किसानों, मजदूरों, डेयरी उत्पादकों, छोटे व्यापारियों और अन्य हितधारकों से व्यापक चर्चा किए बिना किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर न किए जाएं।


राजनीतिक और आर्थिक महत्व

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह आंदोलन लंबा चलता है तो इसका असर केवल राजनीति पर ही नहीं बल्कि व्यापार वार्ताओं पर भी पड़ सकता है।

shambhu border एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है और आने वाले दिनों में इस आंदोलन की दिशा केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगी।


आगे क्या?

किसान संगठनों ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जा सकता है।

फिलहाल shambhu border पर प्रदर्शन जारी है और किसान दिल्ली जाने की अनुमति मिलने का इंतजार कर रहे हैं।


निष्कर्ष

पंजाब से दिल्ली जा रहे किसानों को shambhu border पर रोक दिए जाने के बाद एक बार फिर यह सीमा राष्ट्रीय राजनीति और किसान आंदोलनों का केंद्र बन गई है। किसान प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कर रहे हैं और सरकार से पारदर्शिता तथा व्यापक परामर्श की मांग कर रहे हैं।

दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत का क्या परिणाम निकलता है और क्या shambhu border पर शुरू हुआ यह आंदोलन आगे और बड़ा रूप लेता है।

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