High Court grants relief to Asaram again: राजस्थान हाई कोर्ट ने फिर दी राहत, इलाज के लिए बढ़ाई अवधि
High Court grants relief to Asaram again की खबर एक बार फिर देशभर में चर्चा का विषय बन गई है। राजस्थान हाई कोर्ट ने यौन उत्पीड़न के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम को चिकित्सा उपचार जारी रखने के लिए एक महीने का अतिरिक्त समय देने का आदेश दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया था।
हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद कानूनी और राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। जहां एक पक्ष इसे मानवीय आधार पर लिया गया निर्णय बता रहा है, वहीं दूसरा पक्ष न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश केवल उपचार की अवधि बढ़ाने से संबंधित है और इसका दोषसिद्धि या सजा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
क्या है पूरा मामला?
High Court grants relief to Asaram again मामले की पृष्ठभूमि कई वर्षों पुरानी है। आसाराम को एक नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद उन्होंने विभिन्न अदालतों में फैसले को चुनौती देते हुए स्वास्थ्य के आधार पर राहत की मांग की।
पिछले लगभग दो वर्षों के दौरान उन्हें स्वास्थ्य कारणों से समय-समय पर अंतरिम राहत मिलती रही। लेकिन 2 जून को राजस्थान हाई कोर्ट ने पहले दी गई अंतरिम राहत को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उन्हें आत्मसमर्पण कर जेल लौटना पड़ा।
फिर कैसे मिली राहत?
जेल लौटने के बाद आसाराम की ओर से अदालत में नई याचिका दायर की गई। इसमें कहा गया कि उनका उपचार जोधपुर के आरोग्यम अस्पताल में आयुर्वेदिक पद्धति से चल रहा है और इलाज जारी रखने के लिए अतिरिक्त समय आवश्यक है।
High Court grants relief to Asaram again मामले की सुनवाई जस्टिस कुलदीप माथुर की बेंच ने की। अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए उपचार जारी रखने के लिए एक महीने की अतिरिक्त अवधि प्रदान की।
साथ ही अदालत ने राजस्थान सरकार से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब मांगा और स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
सुप्रीम कोर्ट से पहले लगा था झटका
इस फैसले से एक दिन पहले आसाराम ने सुप्रीम कोर्ट में मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत की मांग की थी।
लेकिन सर्वोच्च अदालत ने तत्काल अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि यदि भविष्य में उनकी स्वास्थ्य स्थिति गंभीर होती है तो नई अर्जी पर शीघ्र सुनवाई की जा सकती है।
इस तरह High Court grants relief to Asaram again की खबर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अगले ही दिन सामने आई।
सरकार ने अदालत में क्या कहा?
राजस्थान सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि 2 जून को आसाराम को अस्पताल ले जाकर चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया था।
सरकार के अनुसार उस समय उनकी स्थिति गंभीर नहीं पाई गई थी और जीवन को तत्काल कोई खतरा नहीं था।
हालांकि उपचार जारी रखने की आवश्यकता को देखते हुए अस्पताल में इलाज की अनुमति पहले से दी गई थी।
अदालत ने क्या निर्देश दिए?
High Court grants relief to Asaram again आदेश में अदालत ने केवल उपचार अवधि बढ़ाई है।
साथ ही निम्न निर्देश भी दिए—
- सरकार चार सप्ताह में जवाब दाखिल करे।
- स्वास्थ्य संबंधी अद्यतन मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
- उपचार की प्रगति की जानकारी अदालत को उपलब्ध कराई जाए।
क्या यह जमानत है?
नहीं।
यह समझना बेहद जरूरी है कि High Court grants relief to Asaram again का अर्थ अंतरिम जमानत मिलना नहीं है।
अदालत ने केवल चिकित्सा उपचार के लिए अतिरिक्त समय दिया है। दोषसिद्धि और सजा यथावत बनी हुई है।
इलाज कहां चल रहा है?
आसाराम का उपचार फिलहाल जोधपुर स्थित आरोग्यम अस्पताल में आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के तहत चल रहा है।
याचिका में दावा किया गया कि उपचार अधूरा है और चिकित्सकों ने कुछ और समय की आवश्यकता बताई है।
कानूनी विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय न्याय व्यवस्था में प्रत्येक दोषी को भी उचित चिकित्सा सुविधा प्राप्त करने का अधिकार है।
यदि किसी कैदी की स्वास्थ्य स्थिति विशेष उपचार की मांग करती है तो अदालत परिस्थितियों के आधार पर राहत प्रदान कर सकती है।
हालांकि प्रत्येक मामले का फैसला उसके तथ्यों और उपलब्ध मेडिकल रिपोर्ट पर निर्भर करता है।
क्या दोषसिद्धि पर कोई असर पड़ेगा?
नहीं।
High Court grants relief to Asaram again आदेश का उनकी सजा या दोषसिद्धि पर कोई प्रभाव नहीं है।
दुष्कर्म मामले में सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा अभी भी प्रभावी है।
आगे क्या होगा?
अब राजस्थान सरकार अदालत में अपनी रिपोर्ट दाखिल करेगी।
इसके बाद अदालत—
- मेडिकल रिपोर्ट की समीक्षा करेगी।
- सरकार का पक्ष सुनेगी।
- आवश्यकता होने पर अगली सुनवाई करेगी।
साथ ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित अपील पर भी आगे सुनवाई होनी बाकी है।
जनता की प्रतिक्रियाएं
सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
कुछ लोगों ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को उचित चिकित्सा सुविधा मिलनी चाहिए।
वहीं कुछ लोगों ने गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए गए व्यक्तियों को बार-बार राहत मिलने पर सवाल भी उठाए।
न्यायालयों की अलग-अलग भूमिका
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों ने अलग-अलग मुद्दों पर विचार किया।
सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत नहीं दी।
वहीं राजस्थान हाई कोर्ट ने उपचार जारी रखने की अनुमति दी।
दोनों आदेशों का कानूनी दायरा अलग है।
निष्कर्ष
High Court grants relief to Asaram again के तहत राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम को चिकित्सा उपचार जारी रखने के लिए एक महीने की अतिरिक्त अनुमति दी है। यह राहत केवल इलाज की अवधि बढ़ाने तक सीमित है और इससे उनकी दोषसिद्धि या आजीवन कारावास की सजा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
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