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Donald Trump Visit China: क्या शी जिनपिंग ने ट्रंप को दिखा दी उनकी औकात?

Donald Trump Visit China

Trump China Visit: जिनपिंग ने एयरपोर्ट पर स्वागत क्यों नहीं किया? क्या Donald Trump पर भारी पड़ रहे हैं शी जिनपिंग

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हालिया चीन दौरा दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह यात्रा केवल एक सामान्य कूटनीतिक दौरा नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे अमेरिका और चीन के बीच बदलते शक्ति संतुलन की बड़ी तस्वीर के रूप में देखा जा रहा है। इस पूरे Donald Trump Visit China कार्यक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा उस पल की हुई जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग खुद एयरपोर्ट पर ट्रंप को रिसीव करने नहीं पहुंचे।

हालांकि ट्रंप के स्वागत में रेड कार्पेट बिछाया गया, 21 तोपों की सलामी दी गई और शानदार प्रोटोकॉल अपनाया गया, लेकिन फिर भी सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस छिड़ गई। कई लोगों ने इसे ट्रंप की “डिप्लोमैटिक बेइज्जती” बताया, जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे चीन की एक तय कूटनीतिक नीति और रणनीति काम कर रही है।

यह पूरा Donald Trump Visit China इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, टेक्नोलॉजी, ताइवान, दक्षिण चीन सागर और वैश्विक शक्ति संतुलन को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में ट्रंप का यह दौरा आने वाले वर्षों की विश्व राजनीति को प्रभावित कर सकता है।

एयरपोर्ट पर जिनपिंग क्यों नहीं पहुंचे?

दुनिया के बड़े नेताओं के दौरे में एयरपोर्ट रिसेप्शन केवल औपचारिकता नहीं होता, बल्कि यह राजनीतिक संकेत भी देता है। इसी वजह से जब शी जिनपिंग एयरपोर्ट पर ट्रंप को रिसीव करने नहीं पहुंचे, तो कई सवाल उठने लगे।

लेकिन कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार चीन में राष्ट्रपति हर विदेशी नेता को एयरपोर्ट पर रिसीव नहीं करते। चीन की व्यवस्था में अक्सर वरिष्ठ मंत्री, प्रोटोकॉल अधिकारी या उपराष्ट्रपति विदेशी नेताओं का स्वागत करते हैं।

यानी यह जरूरी नहीं कि हर बार राष्ट्रपति खुद मौजूद रहें।

फिर भी, क्योंकि यह Donald Trump Visit China बेहद हाई प्रोफाइल माना जा रहा था, इसलिए लोगों की अपेक्षा थी कि शी जिनपिंग खुद एयरपोर्ट पर नजर आएंगे।

सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने लिखा कि “ड्रैगन ने ट्रंप को उनकी जगह दिखा दी।” वहीं कुछ लोगों ने इसे चीन की “पावर डिप्लोमेसी” बताया।

चीन और अमेरिका के रिश्तों में बढ़ता तनाव

यह Donald Trump Visit China ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देशों के रिश्ते कई मुद्दों पर तनावपूर्ण हैं।

अमेरिका लंबे समय से चीन पर अनुचित व्यापार नीति, तकनीकी चोरी और वैश्विक बाजार में दबदबा बढ़ाने के आरोप लगाता रहा है। दूसरी तरफ चीन का कहना है कि अमेरिका उसकी आर्थिक प्रगति को रोकना चाहता है।

डोनाल्ड ट्रंप अपने पिछले कार्यकाल में चीन पर भारी टैरिफ लगा चुके हैं। उन्होंने “America First” नीति के तहत चीन के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था।

अब उनके दोबारा सक्रिय होने और चीन दौरे के कारण यह सवाल उठ रहा है कि क्या ट्रंप फिर से चीन के खिलाफ कड़ा आर्थिक अभियान शुरू कर सकते हैं।

शी जिनपिंग क्यों पड़ रहे हैं भारी?

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में शी जिनपिंग वैश्विक राजनीति में बेहद मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहे हैं।

एक तरफ चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका कई आंतरिक राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रहा है।

इस Donald Trump Visit China के दौरान शी जिनपिंग ने साफ संकेत दिया कि चीन अब केवल अमेरिका के निर्देशों पर चलने वाला देश नहीं है।

चीन ने पिछले कुछ वर्षों में एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व में अपनी आर्थिक और रणनीतिक पकड़ मजबूत की है।

“Belt and Road Initiative” के जरिए चीन कई देशों में बड़े निवेश कर चुका है। इसके अलावा रूस, ईरान और कई विकासशील देशों के साथ उसके संबंध मजबूत हुए हैं।

ऐसे में ट्रंप का चीन दौरा केवल एक राजनीतिक यात्रा नहीं बल्कि शक्ति प्रदर्शन की कूटनीतिक लड़ाई बन गया है।

रेड कार्पेट और 21 तोपों की सलामी का क्या मतलब?

हालांकि शी जिनपिंग एयरपोर्ट पर मौजूद नहीं थे, लेकिन चीन ने ट्रंप के स्वागत में किसी तरह की कमी नहीं छोड़ी।

ट्रंप को चीन की राजधानी में बेहद भव्य सम्मान दिया गया। रेड कार्पेट बिछाया गया, सैन्य बैंड मौजूद रहा और 21 तोपों की सलामी दी गई।

यह संकेत था कि चीन अमेरिका के राष्ट्रपति पद का सम्मान करता है, भले ही राजनीतिक मतभेद कितने भी बड़े क्यों न हों।

इस Donald Trump Visit China में चीन ने एक संतुलित संदेश देने की कोशिश की — सम्मान भी और शक्ति प्रदर्शन भी।

सोशल मीडिया पर क्यों मचा बवाल?

जैसे ही ट्रंप के स्वागत की तस्वीरें सामने आईं, सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई।

कुछ लोगों ने कहा कि जिनपिंग का एयरपोर्ट पर न जाना “कूटनीतिक अपमान” है।

वहीं कुछ विशेषज्ञों ने कहा कि चीन हमेशा अपने प्रोटोकॉल के अनुसार काम करता है और इसे बेइज्जती के रूप में देखना गलत होगा।

इस Donald Trump Visit China ने सोशल मीडिया पर अमेरिका बनाम चीन की बहस को और तेज कर दिया।

कई लोगों ने इसे अमेरिका की घटती वैश्विक ताकत से जोड़कर देखा, जबकि ट्रंप समर्थकों ने कहा कि चीन ट्रंप की लोकप्रियता और सख्त नीति से डरता है।

व्यापार युद्ध फिर बढ़ सकता है?

ट्रंप पहले भी चीन के खिलाफ टैरिफ युद्ध छेड़ चुके हैं।

अगर वह दोबारा सत्ता में आते हैं, तो अमेरिका और चीन के बीच व्यापार तनाव फिर बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह Donald Trump Visit China भविष्य की आर्थिक रणनीतियों को समझने के लिए बेहद अहम है।

अमेरिका चीन से आयात होने वाले कई उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की तैयारी कर सकता है।

वहीं चीन भी अमेरिकी कंपनियों पर दबाव बढ़ाने की रणनीति अपना सकता है।

ताइवान मुद्दा भी बना बड़ा कारण

अमेरिका और चीन के बीच सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक ताइवान है।

चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान को सैन्य और आर्थिक समर्थन देता रहा है।

इस Donald Trump Visit China के दौरान ताइवान का मुद्दा भी चर्चा में रहा।

विशेषज्ञों का कहना है कि चीन ट्रंप को यह दिखाना चाहता है कि एशिया में उसकी ताकत लगातार बढ़ रही है और अमेरिका अब पहले जितना प्रभावशाली नहीं रहा।

दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?

अगर अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ता है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।

वैश्विक बाजार, तेल की कीमतें, टेक्नोलॉजी सेक्टर और अंतरराष्ट्रीय व्यापार सभी प्रभावित हो सकते हैं।

इस Donald Trump Visit China को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह केवल दो नेताओं की मुलाकात नहीं बल्कि दो महाशक्तियों के बीच भविष्य की दिशा तय करने वाला क्षण है।

यूरोप, रूस, भारत और मध्य पूर्व के देश भी इस दौरे पर नजर बनाए हुए हैं।

चीन की रणनीति क्या है?

विशेषज्ञों के अनुसार चीन अब “शांत लेकिन मजबूत” रणनीति पर काम कर रहा है।

वह सीधे टकराव से बचते हुए अपनी आर्थिक और सैन्य ताकत बढ़ा रहा है।

इस Donald Trump Visit China में भी चीन ने यही दिखाया।

उसने ट्रंप का सम्मान किया, लेकिन साथ ही यह भी संकेत दिया कि वह किसी दबाव में आने वाला नहीं है।

शी जिनपिंग का एयरपोर्ट पर न जाना कई लोगों को छोटा कदम लग सकता है, लेकिन कूटनीति में ऐसे संकेत बहुत मायने रखते हैं।

क्या ट्रंप को मिला राजनीतिक नुकसान?

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इस दौरे की शुरुआत ट्रंप के लिए राजनीतिक रूप से थोड़ी असहज रही।

क्योंकि मीडिया और सोशल मीडिया का फोकस नीतियों से ज्यादा “स्वागत प्रोटोकॉल” पर चला गया।

लेकिन ट्रंप समर्थकों का कहना है कि ट्रंप हमेशा आक्रामक और आत्मविश्वासी नेता के रूप में सामने आते हैं और वह चीन के सामने झुकने वाले नहीं हैं।

इस Donald Trump Visit China ने अमेरिका की घरेलू राजनीति में भी नई बहस शुरू कर दी है।

क्या यह केवल प्रोटोकॉल था?

कई पूर्व राजनयिकों का कहना है कि लोगों को इस घटना को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर नहीं देखना चाहिए।

चीन के कूटनीतिक नियम अलग हैं और कई बार राष्ट्रपति खुद एयरपोर्ट रिसेप्शन में शामिल नहीं होते।

लेकिन क्योंकि ट्रंप एक हाई प्रोफाइल और विवादित नेता माने जाते हैं, इसलिए हर छोटी घटना भी बड़ी खबर बन जाती है।

यही वजह है कि Donald Trump Visit China दुनियाभर की मीडिया में लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।

निष्कर्ष

यह कहना गलत नहीं होगा कि यह Donald Trump Visit China केवल एक विदेशी दौरा नहीं बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन की बड़ी तस्वीर का हिस्सा है।

शी जिनपिंग का एयरपोर्ट पर मौजूद न होना भले ही प्रोटोकॉल का हिस्सा हो, लेकिन इसे चीन के आत्मविश्वास और शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है।

दूसरी ओर, ट्रंप अभी भी अमेरिका की राजनीति में एक मजबूत चेहरा बने हुए हैं और चीन के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के लिए जाने जाते हैं।

आने वाले समय में अमेरिका और चीन के रिश्ते किस दिशा में जाएंगे, यह काफी हद तक ऐसे ही कूटनीतिक संकेतों और बैठकों पर निर्भर करेगा।

फिलहाल इतना तय है कि यह Donald Trump Visit China पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा राजनीतिक और रणनीतिक संदेश बन चुका है।

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