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Bombay High Court का बड़ा फैसला: शेयर ऑटो को PoSH Act के तहत ‘कार्यस्थल’ नहीं माना जा सकता, SBI कर्मचारी को राहत

Bombay High Court

Bombay High Court का ऐतिहासिक फैसला: शेयर ऑटो ‘कार्यस्थल’ नहीं, PoSH Act के दायरे पर महत्वपूर्ण टिप्पणी

भारत में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए PoSH Act (Prevention of Sexual Harassment Act, 2013) को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया है। Bombay High Court ने अपने हालिया फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी द्वारा कार्यालय आने-जाने के लिए उपयोग किया गया साझा ऑटो-रिक्शा तब तक ‘कार्यस्थल’ नहीं माना जा सकता, जब तक वह परिवहन नियोक्ता द्वारा उपलब्ध न कराया गया हो।

यह फैसला न केवल PoSH Act की व्याख्या को स्पष्ट करता है बल्कि भविष्य में आने वाले कई मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल भी स्थापित करता है। Bombay High Court ने इस मामले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के एक कर्मचारी के खिलाफ आंतरिक शिकायत समिति (ICC) द्वारा दिए गए निर्णय को रद्द कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 24 मार्च 2023 का है। SBI का एक कर्मचारी अपने कार्यालय जाने के लिए साझा ऑटो-रिक्शा में यात्रा कर रहा था। उसी ऑटो में एक महिला यात्री भी मौजूद थीं, जिन्हें न्यायालय के दस्तावेजों में Respondent 3 के रूप में उल्लेख किया गया है।

यात्रा के दौरान दोनों के बीच शारीरिक संपर्क हुआ। कर्मचारी का कहना था कि ऑटो में अत्यधिक भीड़ होने के कारण यह संपर्क अनजाने में हुआ। दूसरी ओर महिला ने इसे जानबूझकर किया गया व्यवहार माना।

विवाद बढ़ने पर महिला ने कथित तौर पर कर्मचारी पर पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने कर्मचारी को हिरासत में लिया।

FIR और PoSH शिकायत

घटना के बाद पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354-A के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की। इसके साथ ही महिला ने PoSH Act के तहत भी शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत को संबंधित संस्थान की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के पास भेजा गया। जांच के बाद ICC ने कर्मचारी को दोषी माना और उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की।

हालांकि कर्मचारी ने इस फैसले को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद मामला Bombay High Court पहुंचा।

Bombay High Court ने किन सवालों पर विचार किया?

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति फिरदौस पी. पूनिवाला और न्यायमूर्ति सुमन श्याम की खंडपीठ ने की।

सुनवाई के दौरान सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह था कि क्या साझा ऑटो-रिक्शा को PoSH Act के तहत ‘कार्यस्थल’ माना जा सकता है?

Bombay High Court ने PoSH Act की धारा 2(o) का विस्तार से अध्ययन किया। अदालत ने यह देखा कि कानून में कार्यस्थल की परिभाषा क्या है और किन परिस्थितियों में यात्रा के दौरान हुई घटना को कार्यस्थल से जुड़ा माना जा सकता है।

PoSH Act में कार्यस्थल की परिभाषा

PoSH Act, 2013 महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करता है। कानून में कार्यस्थल की परिभाषा व्यापक रखी गई है ताकि अधिकतम सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

हालांकि Bombay High Court ने स्पष्ट किया कि हर स्थान को कार्यस्थल नहीं माना जा सकता।

यदि कोई कर्मचारी नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए वाहन से यात्रा कर रहा हो, तो वह यात्रा कार्यस्थल के दायरे में आ सकती है। लेकिन यदि कर्मचारी स्वयं सार्वजनिक या निजी साझा परिवहन का उपयोग कर रहा है, तो स्थिति अलग होगी।

अदालत का महत्वपूर्ण अवलोकन

सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि जिस ऑटो-रिक्शा में घटना हुई थी, वह न तो SBI द्वारा उपलब्ध कराया गया था और न ही महिला के नियोक्ता द्वारा।

यानी दोनों सामान्य यात्रियों की तरह सार्वजनिक परिवहन का उपयोग कर रहे थे।

इसी आधार पर Bombay High Court ने कहा कि यह स्थान PoSH Act के तहत कार्यस्थल नहीं माना जा सकता।

अदालत ने कहा कि केवल इसलिए कि कोई कर्मचारी कार्यालय जाने के रास्ते में है, वह स्थान स्वतः कार्यस्थल नहीं बन जाता।

ICC की अधिकार-सीमा पर टिप्पणी

फैसले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ICC की अधिकार-सीमा (Jurisdiction) से जुड़ा है।

Bombay High Court ने कहा कि किसी भी शिकायत की जांच शुरू करने से पहले ICC को यह तय करना चाहिए कि कथित घटना वास्तव में कार्यस्थल पर हुई है या नहीं।

यदि घटना कार्यस्थल पर नहीं हुई, तो ICC को मामले की सुनवाई करने का अधिकार नहीं है।

अदालत ने कहा कि अधिकार-क्षेत्र की जांच किसी भी जांच प्रक्रिया का पहला कदम होना चाहिए।

ICC का आदेश रद्द

इन सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद Bombay High Court ने ICC के आदेश को अस्थिर (Unsustainable) करार दिया।

अदालत ने कहा कि चूंकि घटना कार्यस्थल पर नहीं हुई थी, इसलिए ICC के पास शिकायत सुनने का अधिकार ही नहीं था।

फलस्वरूप ICC द्वारा दिया गया पूरा आदेश रद्द कर दिया गया।

क्या अदालत ने आरोपी को निर्दोष घोषित किया?

यह समझना महत्वपूर्ण है कि Bombay High Court ने यह नहीं कहा कि आरोपी कर्मचारी निर्दोष है या दोषी।

अदालत ने केवल यह कहा कि PoSH Act के तहत गठित ICC इस मामले की सुनवाई नहीं कर सकती क्योंकि घटना कार्यस्थल पर नहीं हुई थी।

यौन उत्पीड़न हुआ या नहीं, यह प्रश्न अभी भी अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में तय किया जा सकता है।

कानूनी विशेषज्ञों की राय

कई कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि Bombay High Court का यह फैसला PoSH Act की सीमाओं और दायरे को स्पष्ट करने में मदद करेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार यह निर्णय यह सुनिश्चित करता है कि कानून का उपयोग केवल उन परिस्थितियों में किया जाए जिनके लिए इसे बनाया गया है।

साथ ही यह भी स्पष्ट हो गया है कि ICC को अपनी अधिकार-सीमा का सावधानीपूर्वक परीक्षण करना होगा।

कर्मचारियों और संस्थानों के लिए क्या संदेश?

यह फैसला कंपनियों, बैंकों, सरकारी संस्थानों और निजी संगठनों के लिए महत्वपूर्ण संदेश देता है।

संस्थानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि:

महिलाओं की सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा?

कुछ लोगों को चिंता हो सकती है कि इस फैसले से महिलाओं की सुरक्षा कमजोर होगी, लेकिन Bombay High Court ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है।

अदालत ने केवल कानून की तकनीकी और कानूनी व्याख्या की है।

यदि किसी महिला के साथ सार्वजनिक स्थान पर उत्पीड़न होता है, तो उसके लिए भारतीय दंड संहिता और अन्य कानूनों के तहत कार्रवाई का रास्ता खुला रहता है।

भविष्य के मामलों पर प्रभाव

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला आने वाले वर्षों में कई मामलों को प्रभावित करेगा।

अब ICC को किसी भी शिकायत की सुनवाई से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि:

  1. घटना कार्यस्थल पर हुई हो।
  2. संबंधित स्थान PoSH Act की परिभाषा में आता हो।
  3. समिति के पास जांच का वैधानिक अधिकार हो।

निष्कर्ष

Bombay High Court का यह फैसला भारतीय न्याय व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि PoSH Act के तहत शिकायतों की जांच केवल उन्हीं मामलों में हो सकती है जो कानून द्वारा परिभाषित ‘कार्यस्थल’ के भीतर आते हैं।

इस निर्णय ने ICC की भूमिका, अधिकार-सीमा और PoSH Act की व्याख्या को नई स्पष्टता प्रदान की है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया है कि कानून का उपयोग उसके निर्धारित उद्देश्य और सीमाओं के भीतर ही किया जाए।

भविष्य में Bombay High Court का यह निर्णय कई संस्थानों, कर्मचारियों और कानूनी विशेषज्ञों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है। यह फैसला बताता है कि किसी भी शिकायत की जांच से पहले अधिकार-क्षेत्र की पुष्टि करना कितना आवश्यक है।

यही कारण है कि Bombay High Court का यह निर्णय देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है और इसे PoSH Act से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण हालिया फैसलों में से एक माना जा रहा है।

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