Anupam Kher का बड़ा बयान: ‘धुरंधर 2’ पर उठे विवाद के बीच दर्शकों के समर्थन की जीत
भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में इन दिनों एक फिल्म को लेकर जबरदस्त चर्चा चल रही है — धुरंधर 2। जहां एक तरफ फिल्म बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है, वहीं दूसरी ओर इसे लेकर कुछ आलोचकों ने इसे “प्रोपेगेंडा” फिल्म बताया है। इस पूरे विवाद के बीच दिग्गज अभिनेता Anupam Kher ने खुलकर अपनी राय रखी है और आलोचकों को करारा जवाब दिया है।
इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि आखिर मामला क्या है, क्यों फिल्म विवादों में है, Anupam Kher ने क्या कहा, और इस पूरे घटनाक्रम का दर्शकों और फिल्म इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ रहा है।
धुरंधर 2: सफलता और विवाद का संगम
फिल्म धुरंधर 2, जिसमें Ranveer Singh मुख्य भूमिका में हैं, रिलीज़ के बाद से ही चर्चा का केंद्र बनी हुई है।
👉 एक तरफ:
- सिनेमाघरों में हाउसफुल शो
- दर्शकों की लंबी कतारें
- सोशल मीडिया पर पॉजिटिव रिव्यू
👉 दूसरी तरफ:
- कुछ समीक्षकों द्वारा “प्रोपेगेंडा” का आरोप
- फिल्म की विचारधारा पर बहस
इसी बीच Anupam Kher का बयान सामने आया, जिसने इस बहस को नया मोड़ दे दिया।
Anupam Kher का सीधा जवाब: “दर्शक बेवकूफ नहीं हैं”


दिल्ली में आयोजित International Film Festival Delhi 2026 के दौरान Anupam Kher ने आलोचकों को लेकर बेहद स्पष्ट और मजबूत बयान दिया।
उन्होंने कहा:
👉 “लोग बेवकूफ नहीं हैं जो फिल्म देखने जा रहे हैं।”
उनका मानना है कि अगर कोई फिल्म लगातार हाउसफुल चल रही है, तो इसका मतलब है कि दर्शक उसे पसंद कर रहे हैं — न कि वे किसी भ्रम में हैं।
Anupam Kher ने यह भी कहा कि हमें उन लोगों को ज्यादा महत्व नहीं देना चाहिए जो हर फिल्म को प्रोपेगेंडा बताते हैं।
‘प्रोपेगेंडा’ विवाद पर Anupam Kher का रुख
Anupam Kher ने साफ शब्दों में कहा:
- “ऐसे लोग irrelevant हैं”
- “हमें उनकी बातों पर ऊर्जा खर्च नहीं करनी चाहिए”
- “हमें सफलता का जश्न मनाना चाहिए”
उन्होंने The Kashmir Files और धुरंधर 2 जैसी फिल्मों का उदाहरण देते हुए कहा कि दर्शकों का प्यार ही असली पैमाना है।
👉 उनके अनुसार:
अगर लोग टिकट खरीदकर फिल्म देखने जा रहे हैं, तो वही असली जवाब है आलोचकों के लिए।
सिनेमा सिर्फ कला नहीं, एक बिज़नेस भी है
Anupam Kher ने अपने बयान में सिनेमा के एक अहम पहलू को भी उजागर किया।
उन्होंने कहा:
👉 “सिनेमा एक बिज़नेस भी है”
इसका मतलब यह है कि:
- फिल्में सिर्फ मैसेज देने के लिए नहीं बनतीं
- बल्कि दर्शकों को एंटरटेन करना और कमाई करना भी जरूरी है
उनके अनुसार, हर दर्शक फिल्म से कुछ न कुछ सीख या अनुभव लेकर जाता है, लेकिन यह पूरी तरह व्यक्तिगत होता है।
निर्देशक की तारीफ: Anupam Kher का भावुक पक्ष
Anupam Kher ने फिल्म के निर्देशक Aditya Dhar की जमकर तारीफ की।
उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद फोन करके उन्हें बधाई दी।
👉 उन्होंने कहा:
- “आपकी एक्टिंग और निर्देशन शानदार है”
- “आपकी भावनाएं स्क्रीन पर साफ दिखाई देती हैं”
यह बयान दिखाता है कि Anupam Kher सिर्फ विवादों पर ही नहीं, बल्कि कला की सराहना पर भी ध्यान देते हैं।
दर्शकों की भूमिका: असली फैसला किसका?
इस पूरे विवाद में सबसे अहम सवाल है:
👉 आखिर फैसला कौन करता है — आलोचक या दर्शक?
Anupam Kher के अनुसार:
✔ दर्शक ही असली जज हैं
✔ टिकट खरीदना ही वोट देने जैसा है
✔ बॉक्स ऑफिस ही असली सच्चाई दिखाता है
आज के डिजिटल दौर में:
- लोग खुद तय करते हैं क्या देखना है
- सोशल मीडिया से राय बनती है
- लेकिन अंतिम निर्णय दर्शक ही लेते हैं
फिल्म इंडस्ट्री पर इसका असर
इस तरह के विवादों का असर पूरे इंडस्ट्री पर पड़ता है:
📌 पॉजिटिव असर:
- फिल्मों पर चर्चा बढ़ती है
- दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ती है
- बॉक्स ऑफिस कलेक्शन बढ़ सकता है
📌 निगेटिव असर:
- अनावश्यक विवाद
- फिल्म के असली कंटेंट से ध्यान हटना
- इंडस्ट्री में ध्रुवीकरण
Anupam Kher का मानना है कि हमें पॉजिटिव पहलुओं पर ध्यान देना चाहिए।
क्या ‘प्रोपेगेंडा’ शब्द का ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है?
आजकल हर दूसरी फिल्म को “प्रोपेगेंडा” कह दिया जाता है।
👉 लेकिन सवाल यह है:
- क्या हर फिल्म सच में प्रोपेगेंडा होती है?
- या यह सिर्फ एक ट्रेंड बन गया है?
Anupam Kher का कहना है कि यह शब्द अब बहुत हल्के में इस्तेमाल किया जा रहा है।
सोशल मीडिया और पब्लिक ओपिनियन
आज के समय में:
- ट्विटर (X), इंस्टाग्राम, यूट्यूब
- फिल्म की धारणा बनाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं
लेकिन:
👉 Anupam Kher का मानना है कि
अंत में थिएटर की सीट ही असली फैसला करती है।
धुरंधर 2 की सफलता का मतलब क्या है?
👉 यह सिर्फ एक फिल्म की सफलता नहीं है, बल्कि:
- दर्शकों की पसंद का संकेत है
- कंटेंट की ताकत का प्रमाण है
- और यह दिखाता है कि लोग अपनी पसंद खुद तय करते हैं
निष्कर्ष
पूरे घटनाक्रम से एक बात साफ है कि Anupam Kher ने एक बार फिर अपनी बेबाक राय रखी है।
उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि:
✔ दर्शकों को कम आंकना गलत है
✔ हर फिल्म को प्रोपेगेंडा कहना सही नहीं
✔ और सफलता का जश्न मनाना जरूरी है
👉 धुरंधर 2 की सफलता और उसके आसपास का विवाद हमें यह सिखाता है कि
आखिरकार सिनेमा का असली मालिक दर्शक ही होता है।
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