Site icon

anandabazar patrika:5 चौंकाने वाले खुलासे: समुद्र के नीचे लावा से बनी नई परत, वैज्ञानिकों की बड़ी खोज

anandabazar patrika

समुद्र की गहराई में बना पृथ्वी का नया हिस्सा! वैज्ञानिकों ने पहली बार रिकॉर्ड की दुर्लभ घटना

Focus Keyword: anandabazar patrika

पृथ्वी की सतह लगातार बदल रही है, लेकिन यह परिवर्तन अक्सर लाखों वर्षों में धीरे-धीरे होता है। हालांकि, हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी दुर्लभ भूवैज्ञानिक घटना को रिकॉर्ड किया है जिसने उनकी वर्षों पुरानी धारणाओं को चुनौती दे दी है। anandabazar patrika में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिणी हिंद महासागर की गहराई में वैज्ञानिकों ने पहली बार समुद्र की तलहटी पर नई टेक्टोनिक परत (Oceanic Crust) के बनने की पूरी प्रक्रिया को रिकॉर्ड किया है।

यह खोज इसलिए ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि अब तक वैज्ञानिक केवल अनुमान लगाते थे कि समुद्र की तलहटी पर नई परतें किस तरह बनती हैं। लेकिन इस बार अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से लावा के बाहर निकलने, समुद्री सतह के फटने और नई परत बनने की पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड की गई।


क्या है पूरा मामला?

anandabazar patrika की रिपोर्ट के अनुसार यह अध्ययन दक्षिण हिंद महासागर में एम्स्टर्डम द्वीप (Amsterdam Island) के पास किया गया। यहां समुद्र की गहराई में फ्रेंच नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च (CNRS) के वैज्ञानिकों ने एक विशेष ऑब्जर्वेशन स्टेशन स्थापित किया था।

इस स्टेशन का उद्देश्य समुद्र के नीचे मौजूद दक्षिण-पूर्व भारतीय महासागरीय पर्वत श्रृंखला (South-East Indian Ridge) की गतिविधियों का अध्ययन करना था।


पहली बार रिकॉर्ड हुई नई परत बनने की प्रक्रिया

anandabazar patrika के मुताबिक वैज्ञानिकों ने समुद्र के नीचे पांच अत्याधुनिक ऑटोनॉमस हाइड्रोफोन लगाए थे। ये उपकरण पानी के अंदर होने वाली बेहद हल्की ध्वनियों को भी रिकॉर्ड कर सकते हैं।

फरवरी 2024 में लगाए गए इन उपकरणों ने अप्रैल 2024 के दौरान अचानक लगातार आने वाली भूकंपीय गतिविधियों को रिकॉर्ड किया।

रिकॉर्डिंग में पाया गया कि समुद्र की तलहटी में बड़ी दरारें बन रही थीं और उन्हीं दरारों से भारी मात्रा में मैग्मा (लावा) बाहर निकल रहा था।


कैसे बनी नई टेक्टोनिक परत?

anandabazar patrika के अनुसार वैज्ञानिकों ने देखा कि भूगर्भ में मौजूद दो टेक्टोनिक प्लेटें एक-दूसरे से अलग होने लगीं।

जैसे-जैसे प्लेटें अलग हुईं, उनके बीच गहरी दरार बन गई।

उसी दरार से पृथ्वी के अंदर मौजूद गर्म मैग्मा तेजी से बाहर निकला।

जब यह मैग्मा समुद्र के ठंडे पानी के संपर्क में आया तो वह तेजी से ठंडा होकर ठोस चट्टान में बदल गया।

इसी प्रक्रिया से समुद्र की तलहटी पर एक नई परत तैयार हो गई।


दो घंटे में निकला करोड़ों घनमीटर लावा

anandabazar patrika की रिपोर्ट बताती है कि वैज्ञानिकों ने केवल दो घंटे के भीतर लगभग 15 करोड़ घनमीटर मैग्मा बाहर निकलते हुए दर्ज किया।

इतनी बड़ी मात्रा में लावा निकलना बेहद दुर्लभ माना जाता है।

यह लावा समुद्र की तलहटी पर चादर की तरह फैल गया और नई क्रस्ट का निर्माण करने लगा।


लगातार आते रहे भूकंप

इस दौरान वैज्ञानिकों ने लगातार कई छोटे और मध्यम तीव्रता के भूकंप भी दर्ज किए।

भूकंप समुद्री पर्वत श्रृंखला के कई किलोमीटर लंबे हिस्से में महसूस किए गए।

विशेषज्ञों का मानना है कि यही भूकंपीय गतिविधियां प्लेटों को अलग करने का कारण बनीं।


समुद्र की सतह भी धंस गई

anandabazar patrika के अनुसार जब बड़ी मात्रा में मैग्मा बाहर निकल गया तो समुद्र के नीचे मौजूद मैग्मा चैंबर लगभग खाली हो गया।

इसके बाद समुद्र की तलहटी का ऊपरी हिस्सा लगभग 4.2 मीटर (13.8 फीट) नीचे धंस गया।

यह परिवर्तन वैज्ञानिकों के लिए बेहद चौंकाने वाला था।


वैज्ञानिकों की पुरानी सोच बदली

अब तक वैज्ञानिकों का मानना था कि समुद्र की तलहटी बहुत धीरे-धीरे फैलती है और हर साल औसतन लगभग ढाई इंच बढ़ती है।

लेकिन anandabazar patrika में प्रकाशित इस अध्ययन से पता चला कि यह प्रक्रिया हमेशा धीरे-धीरे नहीं होती।

कई वर्षों तक सब कुछ शांत रहता है और फिर अचानक कुछ घंटों या दिनों में बड़े बदलाव हो जाते हैं।


पृथ्वी की दो-तिहाई सतह ऐसे बनी

वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी की लगभग दो-तिहाई सतह इसी प्रक्रिया से बनी है।

हर बार जब दो टेक्टोनिक प्लेटें अलग होती हैं तो उनके बीच नई महासागरीय परत बनती रहती है।

यही कारण है कि समुद्र की तलहटी लगातार नई बनती रहती है।


सूरज की रोशनी भी नहीं पहुंचती

जिस स्थान पर यह घटना हुई वहां सूर्य का प्रकाश बिल्कुल नहीं पहुंचता।

समुद्र की गहराई कई हजार मीटर है।

इतनी गहराई में काम करना वैज्ञानिकों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होता है।


वैज्ञानिक क्यों हुए हैरान?

फ्रेंच भूभौतिक विज्ञानी जीन-यवेस रॉय (Jean-Yves Royer) ने बताया कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि नई महासागरीय परत बनने की प्रक्रिया इस तरह रिकॉर्ड हो जाएगी।

उनके अनुसार यह घटना लगभग 40 वर्षों में एक बार देखने को मिलती है।


प्लेटें कितनी तेजी से खिसकीं?

अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि दोनों टेक्टोनिक प्लेटें लगभग दो इंच प्रति सेकंड की गति से एक-दूसरे से दूर जा रही थीं।

यही तेज गति इस पूरी प्रक्रिया को रिकॉर्ड करने में मददगार साबित हुई।


हाइड्रोफोन ने निभाई अहम भूमिका

हाइड्रोफोन ऐसे उपकरण हैं जो पानी के अंदर ध्वनि तरंगों को रिकॉर्ड करते हैं।

इन्हीं उपकरणों ने लावा निकलने, दरार बनने और भूकंप की आवाजों को रिकॉर्ड किया।

इन रिकॉर्डिंग्स की मदद से वैज्ञानिक पूरी घटना को समझ पाए।


Nature जर्नल में प्रकाशित हुई रिसर्च

इस महत्वपूर्ण अध्ययन को प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल Nature में प्रकाशित किया गया है।

वैज्ञानिक समुदाय इसे हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण भूवैज्ञानिक खोजों में से एक मान रहा है।


भविष्य में क्या फायदा होगा?

इस अध्ययन से वैज्ञानिकों को पृथ्वी की आंतरिक संरचना और प्लेट टेक्टोनिक्स को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा—


निष्कर्ष

anandabazar patrika में प्रकाशित इस रिपोर्ट ने समुद्र की तलहटी में होने वाली उस रहस्यमयी प्रक्रिया को दुनिया के सामने ला दिया है जिसे अब तक केवल सिद्धांतों के आधार पर समझा जाता था। दक्षिण हिंद महासागर में रिकॉर्ड हुई इस घटना से यह स्पष्ट हुआ कि नई टेक्टोनिक परत का निर्माण हमेशा धीमी गति से नहीं होता, बल्कि कई बार अचानक और बेहद तेज भूवैज्ञानिक गतिविधियों के कारण भी हो सकता है। यह खोज पृथ्वी के विकास, प्लेट टेक्टोनिक्स और समुद्री भूविज्ञान को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

Read More:

Cockroach Janata Party आंदोलन से राजनीति तक: 7 बड़े खुलासे, नौकरी छोड़ विकास ने लॉन्च की अपनी पार्टी | Janata Party

Exit mobile version