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1 Feburary को बजट पेश करने का राज़: क्या है इसके पीछे की वजह?

1 feburary

1 feburary को भारत के बजट पेश करने की परंपरा के पीछे इतिहास और उद्देश्य की एक दिलचस्प कहानी है। पहले भारत में बजट पेश करने की परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही थी, जिसमें बजट हर साल फरवरी के आखिरी कार्य दिवस को प्रस्तुत किया जाता था। लेकिन 2016 के बाद से यह परंपरा बदल गई और 1 feburary को बजट पेश करने का सिलसिला शुरू हुआ। इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे और क्यों 1 फरवरी को बजट पेश करने की परंपरा शुरू हुई और इसके पीछे की वजहें क्या थीं।


1 Feburaryको बजट पेश करने की परंपरा

हर साल 1 feburary को भारत के वित्त मंत्री द्वारा केंद्रीय बजट पेश किया जाता है। यह दिन भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण दिन बन गया है। इस दिन वित्त मंत्री यह घोषणा करते हैं कि सरकार अगले वित्तीय वर्ष के लिए क्या योजना बना रही है, कैसे वह अपने खर्चे का हिसाब रखेगी, और टैक्स के नियमों में क्या बदलाव होंगे। हालांकि, यह परंपरा 2016 से शुरू हुई थी, पहले भारत में बजट पेश करने की तारीख फरवरी के आखिरी कार्य दिवस पर हुआ करती थी।

ब्रिटिश काल से चली आ रही परंपरा

भारत में पहले बजट पेश करने की तारीख ब्रिटिश शासन से निर्धारित थी। तब तक, 1 feburary की तारीख पर बजट पेश करने की परंपरा नहीं थी। जब तक 2016 में सरकार ने इसे बदलने का निर्णय नहीं लिया था, तब तक यह परंपरा चलती रही थी कि बजट फरवरी के आखिरी कार्य दिवस को पेश किया जाता था। इसका मुख्य कारण था कि ब्रिटिश शासन के तहत भारत में बजट पेश करने की यह परंपरा थी, जो बाद में भारतीय शासन में भी कायम रही।

बजट के प्रस्तुतीकरण का समय क्यों बदला?

भारत का वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से शुरू होता है, लेकिन बजट पहले फरवरी के आखिरी दिन पेश किया जाता था। इससे एक समस्या उत्पन्न होती थी—नई नीतियों और कर नियमों को लागू करने में बहुत कम समय मिलता था, क्योंकि नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के पहले ही बजट को मंजूरी दे दी जाती थी। इसका मतलब यह था कि मंत्रालयों, व्यवसायों और करदाताओं को नीति बदलने के लिए बहुत कम समय मिलता था। इसका परिणाम यह हुआ कि कई सरकारी योजनाएँ समय पर शुरू नहीं हो पाई और देरी से लागू हुईं।

1 feburaryकी तारीख को क्यों चुना गया?

2016 में, भारत सरकार ने इस समस्या का समाधान ढूंढने का फैसला किया और बजट पेश करने की तारीख 1 feburary निर्धारित की। इस निर्णय का उद्देश्य था कि नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत से पहले सरकार को ज्यादा समय मिले ताकि वह अपनी योजनाओं को समय पर लागू कर सके। यह कदम पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण था, क्योंकि इससे न केवल सरकार को, बल्कि निजी क्षेत्र और करदाताओं को भी अपनी योजनाओं को सही समय पर लागू करने का अवसर मिलता था।

वित्त मंत्री अरुण जेटली का कदम

1 feburary को बजट पेश करने की परंपरा को पहली बार 2017 में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुरू किया। इस बदलाव के साथ सरकार का उद्देश्य यह था कि लोगों को नए वित्तीय वर्ष की योजना बनाने के लिए और अधिक समय मिल सके। इसके अलावा, इससे सरकारी योजनाओं को लागू करने में भी मदद मिली, क्योंकि बजट के प्रारंभिक अनुमोदन के बाद तत्काल प्रभाव से नीतियाँ लागू की जा सकती थीं।

बजट पेश करने का समय बदला

बजट पेश करने का समय पहले शाम 5 बजे हुआ करता था, लेकिन 1999 में यशवंत सिन्हा, जो उस समय वित्त मंत्री थे, ने इसे सुबह 11 बजे कर दिया। इसका उद्देश्य मीडिया कवरेज और सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ावा देना था। इससे बजट की घोषणा के समय मीडिया को बेहतर तरीके से रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला और जनता के लिए भी इसे समझने का समय मिला।

तारीख बदलने पर विवाद

1 feburary को बजट पेश करने की तारीख बदलने के बाद एक विवाद भी खड़ा हुआ था। कुछ लोगों ने इसका विरोध किया और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में यह तर्क दिया गया था कि बजट को पहले पेश करने से राज्य चुनावों से पहले सरकार को लोकप्रिय घोषणाएँ करने का मौका मिल सकता है, जिससे चुनावों पर असर पड़ सकता है। इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया और कहा कि केंद्रीय बजट राष्ट्रीय स्तर पर होता है, न कि राज्य स्तर पर, और राज्य चुनावों के कारण केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली में कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए।


1 फरवरी का महत्व

1 फरवरी को बजट पेश करने का निर्णय बहुत ही सोच-समझ कर लिया गया था। इसके माध्यम से सरकार को एक पर्याप्त समय मिलता है ताकि वह अपने फैसलों को लागू कर सके और अर्थव्यवस्था को नए दिशा-निर्देश दे सके। यह कदम सरकारी कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए आवश्यक था, क्योंकि बजट को समय पर मंजूरी मिलने से ही सरकारी योजनाएँ और नीतियाँ प्रभावी रूप से लागू हो सकती थीं।

इस बदलाव ने यह सुनिश्चित किया कि भारत में विकासशील और स्थिर अर्थव्यवस्था की दिशा में काम किया जा सके, और 1 फरवरी को बजट पेश करने की परंपरा को बनाए रखा गया है। यह कदम देश की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध हुआ है।


अंत में

भारत में 1 फरवरी को बजट पेश करने का निर्णय न केवल भारत सरकार के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था। इस कदम से सरकारी योजनाओं के समय पर लागू होने का रास्ता खुला और इससे न केवल सरकारी प्रशासन को बल्कि निजी क्षेत्र को भी समय से नीतियों को लागू करने का अवसर मिला। अब 1 फरवरी की तारीख बजट पेश करने के लिए एक स्थायी परंपरा बन चुकी है, जो भारतीय आर्थिक विकास के लिए एक सकारात्मक बदलाव लेकर आई है।

हर साल की तरह, अब भी भारतीय नागरिक इस दिन का बेसब्री से इंतजार करते हैं, क्योंकि यह दिन उनके लिए न केवल नए वित्तीय वर्ष के लिए योजना बनाने का होता है, बल्कि यह एक नई दिशा और अवसर की शुरुआत भी करता है।

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